प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की संपत्ति को जब्त करने का आदेश दे दिया है।  कोर्ट ने विजय माल्या की 5,600 करोड़ की संपत्ति को बैंकों को सौंपने का आदेश दिया है, जो अब तक प्रवर्तन निदेशालय के पास थी।  

कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब नेशनल बैंक के एमडी मल्लिकार्जुन राव ने कहा कि अब पहले प्रमुख बैंक इस संपत्ति को बेचेंगे।  उन्होंने बताया कि विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर में पीएनबी का ज्यादा कर्ज नहीं है, लेकिन एक बार प्रमुख बैंकों की जब्ती के बाद पीएनबी को उसका हिस्सा मिल जाएगा। 

बता दें कि कोर्ट ने 24 मई को 4233 करोड़ रुपए और एक जून को 1411 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी बैंकों को देने का आदेश दिया था।  अब एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के कंसोर्टियम माल्या की इन प्रॉपर्टी को जब्त करेगी। दरअसल, एसबीआई के नेतृत्व में 17 बैंकों के कंसोर्टियम ने विजय माल्या को 9000 करोड़ रुपए का लोन दिया था। 

अब उस कर्ज की रिकवरी के लिए बैंकों की ओर से उसकी संपत्ति को बेचा जा रहा है।  बैंक इस संपत्ति की नीलामी भी करवा सकता है।  विशेष न्यायाधीश जे सी जगदाले ने कहा कि संपत्तियों के दावेदार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि माल्या ने खुद बकाया राशि के भुगतान का प्रस्ताव रखा था।  कोर्ट ने आदेश में कहा कि यह ध्यान देने वाली बात है कि दावा करने वाले बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं और ये जनता के पैसे का लेन-देन कर रहे हैं।  बता दें कि पिछले महीने पीएमएलए कोर्ट ने कहा था कि ईडी की तरफ से विजय माल्या की जो संपत्ति जब्त की गई है, बैंक उनसे वसूली कर सकता है।