क्यूआर कोड स्कैन करके पेमेंट करने वालों को जरा सावधान होने की जरूरत है क्योंकि उनके साथ फ्रॉड हो सकता है। कॉन्टैक्टलेस पेमेंट करने के वक्त कई लोग क्यूआर कोड को स्कैन करके पैसे ट्रांसफर करते है। धोखेबाज उसी का फायदा उठाते है। वो क्यूआर कोड को बदल देते है जिससे पेमेंट फ्रॉडस्टर के अकाउंट में चला जाता है। इसी क्यूआर कोड को बदल कर कोई और क्यूआर कोड डाल देने को ही क्यूआर कोड फिशिंग कहते है। जिससे आपके पैसे दुकानदार को ना जाकर फ्रॉडस्टर के अकाउंट में जाता है।

आप जैसे ही उस क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे। आपसे यूपीआई पिन मांगा जाएगा। आपको लगेगा इससे पैसे आपके अकाउंट में आएंगे। लेकिन यूपीआई पिन देते ही आपके पैसे स्कैमर के अकाउंट में चले जाएंगे।

इसी तरह संभावना है कि पेट्रोल पंप या किसी दुकानदार के पास आप वहां लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके उसे पेमेंट करते हो। वहां पर स्कैमर ओरिजनल क्यूआर कोड को अपने क्यूआर कोड से बदल सकता है। जिससे क्यूआर कोड को स्कैन कर होने वाला पेमेंट स्कैमर के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है।

इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए जब भी क्यूआर कोड को स्कैन करके पेमेंट करें उस टाइम सावधानी बरतें। क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद उसमें रिसीवर को नाम आता है उसे जरूर कन्फर्म कर लें। मैसेज या ई-मेल में मिले कोई अनजान या नए क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें।

क्यूआर कोड को फोन के कैमरे से सीधे स्कैन के बजाय ऐसे ऐप से करें जो क्यूआर कोड की डिटेल्स भी बताता हो। बैंक में हुए किसी गलत ट्रांजैक्शन पर तुरंत एक्शन लें। फ्रॉड का शिकार होने पर इसकी शिकायत आप साइबर सेल में कर सकते है।