नीली बत्ती लगी कार के आगे भारत सरकार इंटेलीजेंस ब्यूरो (आइबी) की प्लेट लगी थी। आइबी की वरिष्ठ अधिकारी का परिचय देकर लोगों में रौब गांठती थी। इसी आड़ में बेरोजगारों को भी ठगने लगी थी। सरकारी नौकरी के लिए पांच लाख गवां चुके युवक को संदेह हुआ तो रिपोर्ट दर्ज करा दी। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने फर्जी आइबी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया।


सूत्रों के अनुसार, सरकारी नौकरी के लिए पांच लाख गवां चुके सत्यब्रत बसु राय 23 नामक युवक ने जादवपुर थाने में एक महिला के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि नौकरी नहीं लगने पर जब रुपये लौटाने का दबाव डाला गया तो नीली बत्ती लगी कार में घूमने वाली महिला ने खुद को आइबी की वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए धमकी देनी शुरू कर दी। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर जांच शुरू कर दी थी। सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला गया था। आखिरकार पुलिस ने 47 वर्षीय आरोपित महिला को दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम अचिरा जादव बताया।


असम के गुवाहाटी में जन्मी अचिरा ने तिनसुकिया से स्कूल तथा गुवाहाटी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद उसने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से वैश्विक आतंकवाद के ऊपर पीएचडी की थी। महिला के पिता सुबोध चंद्र चौधरी अरुणाचल प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आइएफएस अधिकारी हैं।


पूछताछ में पता चला कि अचिरा का पति महेंद्र प्रसाद जादव कोलकाता के कसबा और हल्दिाया में कस्टम अधिकारी के रूप में तैनात थे। वर्ष 2017 में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद वह जादवपुर इलाके में आकर रहने लगी थी। तभी से उसने आइबी अधिकारी का परिचय देकर बेरोजगार युवकों व युवतियों को सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगना शुरू कर दिया था। पुलिस के अनुसार, महिला की बोलचाल और उसकी पोशाक से पहली नजर में शक करना काफी मुश्किल था। आरोपित महिला की कार को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।