दुनियाभर में रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत हो चुकी है।  रामजान की शुरुआत में ही फ्रांस के एक कदम ने दुनियाभर के मुसलमानों के बीच गुस्सा बढ़ा दिया है।  दरअसर फ्रांस की सीनेट ने कट्टरपंथ इस्लाम पर लगाम कसने के लिए एक बिल को पास किया है।  

इस बिल को लेकर अब मुसलमानों के बीच नाराजगी बढ़ गई है।  उनका कहना है कि ये बिल मुसलमानों को अलग थलग करने का जरिया बनेगा।  इस बिल को कई तरह के संशोधन के साथ पास किया गया है।  इस बिल में कई सख्त नियम बनाए गए हैं और इसे नेशनल असेंबली से मंजूरी भी मिल चुकी है। 

सीनेट में इस बिल के पक्ष में 208 वोट डाले गए, जबकि खिलाफ में 109 वोट पड़े।  इस बिल को पास करने से पहले सीनेट में इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ। काफी लंबे दौर की बातचीत के बाद इस बिल को पास कर दिया गया।  बिल में शामिल किए गए नए संशोधनों का मकसद अतिवाद से मुकाबला करना है।  

इस बिल में वो सभी प्रावधान किए गए हैं, जिसमें स्कूल ट्रिप के दौरान बच्चों के माता-पिता के धार्मिक पोशाक पहनने पर रोक लगा दी गई है।  इसके साथ ही नाबालिग बच्चियों के चेहरे छिपाने या सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक प्रतीकों को धारण करने पर रोक लगाने की बात कही गई है.

इसके साथ ही यूनिवर्सिटी परिसर में प्रार्थना करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।  इसके साथ ही शादी समारोह में विदेशी झंडे लहराने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।  ब्रिटेन के अखबार इ इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक पब्लिक स्विमिंग पूल में बुर्का पहनने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। यही नहीं बिल का पास करने के आखिरी समय में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अनुरोध पर प्राइवेट स्कूलों में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ लडऩे के लिए एक संशोधन भी जोड़ा गया है। 

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से किए गए इस नए संशोधन के बाद फ्रेंच अफसरों को विदेशी संगठनों को फ्रांस में प्राइवेट स्कूलों की स्थापना से रोकने की अनुमति देगा।  बता दें कि तुर्की के इस्लामिक संगठन मिल्ली गोरस द्वारा दक्षिणी फ्रांस के अल्बर्टविले में स्थापित किया गया था।  इस बिल के कानून बनने के बाद अब फ्रांस में इस तरह के विदेशी प्राइवेट स्कूलों को स्थापित नहीं किया जा सकेगा।