बुधवार शाम हुए हमले में त्रिपुरा के ग्रामीण विकास मंत्री नरेश जमातिया व सीपीआईएम के तीन नेता बाल बाल बच गए। कहा जा रहा है कि हमला आईपीएफटी के समर्थकों ने किया था। आईपीएफटी आदिवासियों के लिए अलग राज्य की मांग कर रही है। अपनी मांग को लेकर आईपीएफटी ने 10 जुलाई से 20 जुलाई तक रेल व रोड रोको आंदोलन चलाया था। 

केन्द्र, राज्य सरकार व राज्यपाल तथागत रॉय के हस्तक्षेप के बाद आंदोलन वापस लिया गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हमले में सीपीआई-एम के चार कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अगरतला के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। 

डॉक्टरों के मुताबिक वे खतरे से बाहर है। मंत्री नरेश जमातिया ने बताया कि केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व की सरकार के खिलाफ 6 बिंदुओं वाले चैप्टर की मांग को लेकर कैंपेन चल रहा है। इसी को लेकर एक रैली आयोजित की गई थी। अचानक कुछ बदमाशों ने पथराव करना शुरू कर दिया। उन्होंने रैली पर हमला किया। इलाके में त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवानों व अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। वे मुझे नजदीकी सिक्योरिटी कैंप में ले गए लेकिन हमारे चार स्थानीय नेता हमले में घायल हो गए। रैली में जो समर्थक मौजूद थे वे किसी तरह ग्राउंड से बचकर भाग निकलने में कामयाब रहे। 

जमातिया ने कहा कि पुलिस ने तुरंत आसपास के इलाकों में बदमाशों की तलाश के लिए अभियान शुरु किया लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। बकौल जमातिया, ऐसी संभावना है कि बदमाश आईपीएफटी के समर्थक थे। वे पूर्व में भी ऐसा कर चुके हैं। यह सीपीआईएम के खिलाफ विपक्षी भाजपा की साजिश का हिस्सा है। राजनीतिक बदमाश इस तरह की गतिविधियों में शामिल है। उनके खिलाफ पार्टी निश्चित रूप से कार्यक्रम लॉन्च करेगी। सीपीआई स्टेट सेक्रेटरी बिजान धर ने घटना की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि आईपीएफटी की इस तरह की अलोकतांत्रिक गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। पार्टी पहले ही सरकार से उन अपराधियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का अनुरोध कर चुकी है जो लगातार हिंसा फैला रहे हैं।