पटना। सरकारी आदेश की अवहेलना और संपत्ति विरूपण अधिनियम के उल्लंघन के आरोप वाले एक 13 वर्ष पुराने मामले में मंगलवार को पटना की एक विशेष अदालत ने राज्य के पूर्व पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन समेत चार लोगों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आदि देव ने मामले की सुनवाई के बाद आज अपना फैसला सुनाया। 

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अपने फैसले में विशेष अदालत ने इस मामले में अभियुक्त बनाए गए पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन, राजद के पूर्व महानगर अध्यक्ष खुर्शीद आलम सिद्दीकी ,डॉक्टर अनवर आलम और सिराज वारसी अंसारी को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया। चारों अभियुक्त न्यायालय में सशरीर उपस्थित थे। मामला वर्ष 2009 के फुलवारी शरीफ विधानसभा उपचुनाव का था। 

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चुनावी प्रक्रिया के दौरान लोगों के बीच बांटे गए और दीवारों पर साटे गए पर्चो को आपत्तिजनक बताते हुए फुलवारी शरीफ थाना में इस मामले की प्राथमिकी फुलवारी शरीफ थाना कांड संख्या 374/ 2009 के रूप में भारतीय दंड विधान की धारा 188 और संपत्ति विरूपण अधिनियम की धारा 2, 3 एवं 4 के तहत दर्ज की गई थी। मामले में जांच के बाद पुलिस ने उपरोक्त अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं किया गया था।