असम में पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया की पत्नी हेमप्रभा सैकिया ने बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिससे पूरे देश में खलबली मच गई है। हेमप्रभा सैकिया ने बताया कि असम से 1991 में पहली बार राज्यसभा के सांसद चुने जाने के पहले से ही पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के घर में किराएदार के रूप में रह रहे हैं।

आपको बता दें कि हेमप्रभा कांग्रेस की नेता और पूर्व विधायिका भी रह चुकी हैं। वो बताती है कि वे आज भी सैकिया के किराएदार हैं। हर महीने वे समय पर अपने कमरे का किराया अदा करते हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए हेमप्रभा सैकिया ने बताया कि मनमोहन सिंह आज भी घर में किराएदार के रूप में रह रहे हैं।

बता दें कि गुवाहाटी के सोरूमटरिया स्थित असम के पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के मकान नंबर 7 ए की पहली मंजिल पर डॉ. मनमोहन सिंह का किराए का कमरा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद डॉ. सिंह कभी अपने किराए के कमरे में रहने भी नहीं आए। मगर प्रधानमंत्री बनने से पहले वे इस किराए के कमरे में रह चुके हैं।

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यहां पर इसलिए नहीं आए, क्योंकि उनके आने के बाद सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था करनी पड़ेगी। ऐसे में इलाके के लोगों को विभिन्न तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए वे यहां चाह कर भी नहीं आ सके। डॉ. सिंह का व्यक्तित्व बेहद सरल व आम जनमानस वाला है।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान डॉ. सिंह अपनी पत्नी के साथ दिसपुर सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मतदान करने के लिए आए थे। हालांकि तब उनसे मिलना नहीं हो सका था क्योंकि मैं यहां नहीं थी। उन्होंने बताया कि आज भी डॉ. सिंह प्रत्येक माह 700 रुपये कमरे का किराया देते हैं।

उनके कमरे के बाहर चौखट पर उनका नेम प्लेट लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे किराएदार को पाकर मैं काफी गर्व महसूस करती हूं। डॉ. सिंह को लेकर राज्य की जनता में एक धारणा है कि वे असम से राज्यसभा के सांसद लगातार चुने गए। प्रधानमंत्री भी 10 वर्षों तक रहे। हालांकि असम के विकास के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय नहीं रहा है।

राज्य की जनता डॉ. सिंह से प्रधानमंत्री रहते हुए कुछ विशेष अपेक्षा रखते थे, जो पूरा नहीं हो सका। डॉ. सिंह पहले 1991 से राज्यसभा के सांसद के रूप में असम से चुने गए। उसके बाद वे 1995, 2001, 2007 और 2013 में लगातार असम से राज्यसभा के सांसद चुने जाते रहे। वे 1998 से 2004 तक राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे।