लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानि एलएसी के पास से चीनी सेना पीछे हट रही है। इस पर पूर्व सैनिक अधिकारियों का कहना है कि यह भारत के साहस, धैर्य और सेना के शौर्य का कमाल हैं लेकिन चीन विश्वास के लायक कतई नहीं है। नौ माह से दोनों देश की सेनाएं आमने सामने हैं और चीन बार बार भारत को पीछे हटने को कह रहा था लेकिन भारत ने चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए बड़ी संख्या में सेना तैनात कर रखी है।

चीन को मुंह की खानी पड़ी है। यह सेना की बड़ी जीत है। सेना ने अपनी तैयारी कर रखी थी और भारत का चीन को साफ संदेश था कि सीमा की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार के सख्त रुख और सेना की तैयारी व शौर्य ने चीनी सेना को पीछे हटने को मजबूर कर दिया लेकिन यहा कहना चाहूंगा कि चीन विश्वास करने के लायक नहीं है।

मेजर जनरल (रिटा.)डा. जीडी बख्शी चीन पर विश्वास करना बड़ी गलती होगी। यह सही है कि वह पीछे हट रहा है क्योंकि लद्दाख में भारत के मुकाबले चीन कमजोर पड़ता है लेकिन अब वह भूटान सीमा पर हरकत करने की कोशिश करेगा और पाकिस्तान को सीमा पर छेड़छाड़ करने को कहेगा। यह अच्छी बात है कि सरकार व सेना पाकिस्तान व चीनी सीमा पर खास ध्यान दे रही है जिससे उनकी हर चाल नाकाम होगी।

ब्रिगेडियर (रिटा.) रामकरण सिंह गुलिया सबसे पहले कहना चाहूंगा कि चीन विश्वास के लायक नहीं है। एलएसी पर चीन को समझ आ गया कि भारतीय सेना पीछे हटने वाली नहीं है और सेना किसी भी स्तर पर लड़ने को तैयार है। खुशी है कि सीमा पर तनाव कम हुआ है लेकिन भारत को भूटान व लद्दाख सीमा पर चौकस रहना होगा। अब पाकिस्तान भी अपनी हरकत कर सकता है।

मेजर जनरल(रिटा.) पीके शर्मा चीन बहुत चालाक है। वह बहुत लंबा सोचकर चलता है। आज उसने सरकार व सेना का रुख देख लिया तो पीछ़े हट रहा है लेकिन वह विश्वास के लायक नहीं है। क्योंकि चीन गुलाम कश्मीर से पाकिस्तान के बीचो-बीच रोड बना रहा है जो ग्वादर पोर्ट तक जाएगी। चीन उसे सुरक्षित रखना चाहता है। चीन लद्दाख व सिक्किम में किसी भी वक्त धोखा दे सकता है।