पूर्व विदेश सचिव (Former foreign secretary) निरुपमा राव (Nirupama Rao) ने कहा है कि  "नेहरू को दोष देने से भारत (India) के लिए चीन (China) की समस्या का समाधान नहीं होगा।" इन्होंने आगे कहा कि "... चीन के साथ जो कुछ भी गलत हुआ, उसके लिए कई दोष (प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू) ... मुझे लगता है कि वह एक शांतिपूर्ण वातावरण की आवश्यकता पर भी काफी ध्यान केंद्रित कर रहे थे जिसमें भारत अपने पड़ोस को मजबूत करने के लिए विकसित हो सके ”।

निरुपमा राव (Nirupama Rao) ने आगे बताया कि  " उन्होंने महसूस किया कि चीन (China) के साथ दोस्ती, बातचीत, या किसी तरह की समझ की जरूरत है ... उन्होंने ही हिमालयी सीमाओं के करीब हमारे प्रशासन को मजबूत करने, कनेक्टिविटी का विस्तार करने और बुनियादी ढांचे में सुधार करने के निर्णय लिए। इसलिए, नेहरू को दोष देने से हमारे लिए पूरी तरह से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है… ”।

राव (Nirupama Rao)ने एक किताब लिखी है जिसका शीर्षक है: "द फ्रैक्चर्ड हिमालय: इंडिया-तिब्बत-चीन 1949-1962"। पुस्तक "तिब्बत कारक को इस समीकरण में रखते हुए, भारत और चीन (India-China) के बीच संबंधों के इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास करती है"।