कैब के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान देकर कोपभाजन हुए पूर्व मुख्यमंत्री तथा असम गण परिषद के संस्थापक अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार महंत ने कहा है कि राज्यवासियों के पक्ष में रहने से अगर उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाए तो भी कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था और उन्होंने अगप(प्र) का गठन किया था।

एक स्थानीय टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में महंत ने मौजूदा पार्टी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग उनकी आलोचना कर पार्टी से बाहर निकालने की धमकी दे रहे हैं उन्हें असम आंदोलन के शहीदों के त्याग और बलिदान के बारे में कुछ मालूम नहीं है। उन्हें सरकार में शामिल रहते हुए भी कैब का विरोध करना चाहिए।

लेकिन वे ऐसा न कर भाजपा के साथ बातचीत कर आगे फैसला लेने की बात कर रहे हैं। इससे केंद्र सरकार को कैब लाना आसान हो गया है। महंत ने कहा कि पड़ोसी राज्य नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम आदि ने कैब का  विरोध कर दिया है पर मित्रदल की सरकार में सहयोगी असम गण परिषद का नेतृत्व यह हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है। महंत ने कहा कि असम समझौते पर उन्होंने तत्कालीन आसू अध्यक्ष के रुप में हस्ताक्षर किया था।
उनके साथ दिवंगत भृगु कुमार फूकन और बिराज शर्मा ने केंद्र सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 855 शहीदों के त्याग और बलिदान का फसल है असम समझौता। आसू के गर्भ से ही असम गण परिषद का जन्म हुआ था। अब उसी अगप का मौजूदा नेतृत्व भाजपा नित सरकार में बने रहने का लालच में असम समझौते को दरकिनार करने तथा आसू को नजरअंदाज करने में लगा हुआ है। महंत ने कहा-असम समझौते का अछरशः पालन होना ही होगा। कैब लाकर असम समझौते को नजरअंदाज करने की भाजपा की अपनी वोटबैंक सुरक्षित करने की कथित साजिश में अगप के मौजूदा नेतृत्व फंस चुके हैं।