पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने कहा कि त्रुटि पूर्ण एनआरसी प्रकाशन के लिए राज्य सरकार जिम्मेवार होगी। उन्होंने कहा है कि एनआरसी का अद्यतन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है। लेकिन एनआरसी प्रकाशन के बाद उसमें किसी तरह की कमी सामने आती है तो वे इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेवार ठहराएंगे। क्योंकि यदि किसी भारतीय नागरिक का नाम एनआरसी में नहीं आता है तो इसका सीधा मतलब होगा कि एनआरसी प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने में सरकार विफल रही है।


वर्ष 1985 में आसू और केंद्र सरकार के बीच हुए असम समझौते के तहत एनआरसी अद्यतन का कार्य चल रहा है, जिसका उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे उन विदेशी नागरिकों की पहचान करना है जो 25 मार्च 1971 के बाद अवैध तरीके से यहां आकर रह रहे हैं। प्रफुल्ल कुमार महंत असम समक्षौते पर आसू की ओर से हस्ताक्षर करने वालों में से एक हैं। महंत के साथ कई संगठनों ने अभी से ही राज्य सरकार पर निशाना साधने में लग गई है।

संगठनों को अाशंका है कि त्रुटि मुक्त भी विदेशी का नाम शामिल न हो और एक भी भारतीय का नाम न छूटे। जिसे देखते हुए असम प्रदेश भाजपा सरकार बचाव में उतर आई है। पार्टी अध्ययक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा है कि एनआरसी में किसी प्रकार की गड़बड़ी के लिए राज्य सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। क्योंकि सरकार सीधे तौर पर एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया में शामिल नहीं है।

सरकार केवल ढांचागत सुविधाएंं मुहैया करा रही है। दास ने कहा है कि जो लोग अभी से एनआरसी के लिए राज्य  सरकार को दोषी ठहराना शुरू कर दिए हैं,  उन्हें याद रखना चाहिए की सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को एनआरसी प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करने की हिदायत दी थी और सरकार त्रुटि मुक्त एनआरसी प्रकाशित होने की गारंटी नहीं दे सकती। क्योंकि कागजातों का सत्यापन करने का कार्य सरकार नहीं बल्कि एनआरसी संयोजक के नेतृत्व में हो रहा है।