प्रतिबंधित ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स(एटीटीएफ) के पूर्व चीफ रंजीत देबबर्मा को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। रंजीत देबबर्मा को खोवई जिले की सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट(एसडीजेएम) की कोर्ट में दूसरी बार पेश किया गया। देबबर्मा को 11 नवंबर को उनके सिधई स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। उन पर देशद्रोह का आरोप है।

उन्होंने पुलिस की अनुमति के बगैर तेलियामुरा में जनसभा की थी। आरोप है कि जनसभा के दौरान उन्होंने कुछ राष्ट्र विरोधी विचार व्यक्त किए थे। देबबर्मा ने कथित रूप से त्रिपुरा के भारतीय संघ में विलय को चुनौती दी थी। देबबर्मा पहले उग्रवादी थे। उन्हें 2012 में बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था। नरसंहार के कई मामलों व अन्य अपराधों में संलिप्तता के कथित आरोपों के चलते उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। जनवरी 2013 में उन्हें मेघालय के दावकी बॉर्डर के जरिए देबबर्मा को भारतीय अथॉरिटीज के हवाले किया गया था।

2015 में त्रिपुरा की एक अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था। हाल ही में रंजीत देबबर्मा ने त्रिपुरा यूनाइटेड पीपुल्स काउंसिल(टीयूपीसी) का गठन किया था। इसमें विभिन्न पूर्व उग्रवादी समूहों के सरेंडर करने वाले उग्रवादी शामिल हैं। अगस्त में भाजपा में शामिल हुए विधायक रॉय बर्मन ने रंजीत देबबर्मा की गिरफ्तारी में सरकार के इरादे को लेकर भी सवाल खड़ा किया। देबबर्मा का कहना है कि 1993 में विभिन्न संगठनों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस दौरान सरकार ने जो आश्वासन दिए थे उन्हें लागू किया जाए। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने हाल ही में विधानसभा में बताया था कि देबबर्मा के पास से कुछ संवेदनशील दस्तावेज मिले। उन्हें जब्त कर लिया गया। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया था कि वह त्रिपुरा के उन उग्रवादी संगठनों से संवाद बहाल करें जिनके ठिकाने बांग्लादेश में हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा(एनएलएफटी) के अनुरोध के बाद केन्द्र सकार ने संगठन के साथ तीन त्रिपक्षीय वार्ताएं की। इसमें त्रिपुरा सरकार भी शामिल थी लेकिन पिछले कुछ महीनों से संवाद पर कोई प्रगति नहीं हुई है। मैं केन्द्र सरकार से एनएलएफटी के साथ फिर से वार्ता शुरू करने का अनुरोध करता हूं। आपको बता दें कि आरटीआई एक्टिविस्ट व कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई को भी देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 12 सितंबर को मोरान के बामुनबारी में एक जनसभा के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। असम के विभिन्न थानों में अखिल गोगोई के खिलाफ 12 मामले दर्ज किए गए हैं।