असम के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तरुण गोगोई रोहिंग्या मुस्लिमों के समर्थन में उतर आए हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों के मसले को लेकर उन्होंने केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर सरकार के रूख को क्रूर बताया। गोगोई ने कहा कि केन्द्र सरकार शरणार्थियों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव कर रही है। बकौल गोगोई,हम महात्मा गांधी और अशोक की भूमि हैं, हमें सहिष्णुता और दया दिखानी चाहिए। हमें उन शरणार्थियों तक पहुंचना चाहिए जिन्हें उनके देश से भगा दिया गया। विवेकानंद ने भी कहा था कि हम उन सभी को शरण देनी चाहिए जिन पर अत्याचार हुए हैं।

गोगोई ने आरोप लगाया कि भारत सरकार धर्म के आधार पर निर्लज्ज तरीके से ध्रुवीकरण कर रही है। रोहिंग्या मुस्लिमों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताने संबंधी केन्द्र के दावे पर कांग्रेस नेता ने कहा, उस खतरे को साबित करो और सभी रोहिंग्याओं पर आरोप लगाने की बजाय दोषियों को जेल भेजो। तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे गोगोई ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को संभावित टेरर सस्पेक्ट्स की श्रेणी में रखना इस देश के चरित्र के खिलाफ है। मोदी सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हलफनाम दाखिल कर रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। सरकार ने कहा था कि रोहिंग्या अप्रवासियों के इस्लामिक स्टेट और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध हैं। सरकार चाहती है कि हजारों रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने के लिए कानूनी समर्थन मिले क्योंकि वे भारत की आतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
सरकार ने कहा था कि अगर रोहिंग्या मुस्लिमों को यहां रहने की इजाजत दी गई तो वे भारतीयों के प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर देंगे। आपको बता दें कि भारत में करीब 40 हजार के करीब रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं। गुरुवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम अवैध अप्रवासी हैं। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी नहीं हैं जिन्होंने भारत में शरण के लिए आवेदन किया हो। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से आयोजित सेमिनार में गृह मंत्री ने हैरानी जताई कि कुछ लोग रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने पर क्यों आपत्ति जता रहे हैं जब म्यांमार उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है। गृह मंत्री ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने को लेकर भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करेगा क्योंकि भारत ने यूएन रिफ्यूजीज कन्वेंशन 1951 पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।