इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछले महीने फॉर्म-16 में बड़ा बदलाव किया था जो 12 मई 2019 से लागू गया है। नए फॉर्म में इसे जारी करने वाली कंपनियों को अब कर्मचारी के बारे में ज्यादा जानकारियां देनी होंगी। कर्मचारी की प्रॉपर्टी से हुई कमाई, उसे दूसरे नियोक्ताओं की ओर से मिले भुगतान की डिटेल अब फॉर्म-16 में दी जाएगी। 

इससे आयकर विभाग को टैक्स चोरी की जांच में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि नए फॉर्म-16 में अलग-अलग टैक्स सेविंग्स स्कीम के तहत किए गए निवेश, उससे जुड़ी कटौतियां, कर्मचारी को मिले अलग-अलग भत्तों और दूसरे स्त्रोतों से हुई आय का ब्यौरा भी शामिल होगा। कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष खत्म होने के बाद फॉर्म-16 जारी करते हैं। इसमें कर्मचारियों के टीडीएस की जानकारी होती है। 

फॉर्म-16 के आधार पर ही कर्मचारी अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं। कंपनियां फॉर्म-16 को आमतौर पर जून महीने में जारी करती हैं। आपको बता दें कि इनकम टैक्स विभाग वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न फॉर्म नोटिफाई कर चुका है। नौकरी करने वालों के अलावा ऐसे लोग जिनके खातों का ऑडिट नहीं होना है उन्हें 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करना है।