विदेश मंत्रालय ने कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) बनाने की प्रक्रिया निष्पक्ष रही और 19 लाख लोग जो इससे बाहर रह गए हैं, उनके पास इसे चुनौती देने के लिए पर्याप्त कानूनी विकल्प मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने जोर देकर कहा कि जिनके नाम अंतिम एनआरसी में नहीं हैं, उनके प्रति कोई पक्षपात या पूर्वाग्रह नहीं है।

मीडिया को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा, कौन सा देश अवैध प्रवासियों को अपनी सीमा में रहने की इजाजत देता है, निश्चित तौर पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए और यह किया जा रहा है। हम स्पष्ट कर चुके हैं कि एनआरसी वैध और पारदर्शी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, यह उच्चतम न्यायालय की अनुमति से की गई वैध प्रक्रिया है। यह सरकार की ओर से शुरू प्रक्रिया नहीं है। यह निष्पक्ष प्रक्रिया है। अधिकरण में अपील करने का अधिकार है। इसके बाद भी लोग उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायाल का रुख कर सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासी के तौर पर पहचाने गए लोगों को वापस भेजा जाएगा तो उन्होंने कहा, हम इस पर बात नहीं करें कि क्या होगा और कैसे पूरे मामले को सुलझाया जाएगा। भविष्य में क्या होगा, उस पर बाद में फैसला लिया जाएगा। मेरे पास उसका जवाब नहीं है।