गोवा के समुद्र तटीय गांव कलंगूट के एक पार्क में क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) की पीतल की एक बड़ी प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसने फुटबॉलर के पुर्तगाली संबंधों को लेकर तटीय राज्य में हलचल मचा दी है। प्रतिमा का मंगलवार को उद्घाटन किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को इस दिग्गज से प्रेरित करना था। साइट पर हालांकि काले झंडे से विरोध शुरू हो गया, प्रदर्शनकारियों ने राज्य के अधिकारियों पर अर्जुन पुरस्कार विजेता और पूर्व भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान ब्रूनो (Former football team captain Bruno) जैसे स्थानीय फुटबॉल दिग्गजों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

स्थानीय भाजपा विधायक और बंदरगाह मंत्री ने कहा, यह भारत में क्रिस्टियानो रोनाल्डो  (Cristiano Ronaldo) की पहली मूर्ति है। यह हमारे युवाओं को प्रेरित करने के अलावा और कुछ नहीं है। अगर आप फुटबॉल को दूसरे स्तर पर ले जाना चाहते हैं, तो ये वही है जो लड़कों और लड़कियों को उनके साथ सेल्फी लेने से प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा, मूर्ति (Cristiano Ronaldo) केवल प्रेरित करने के लिए है। हम सरकार से अच्छे मैदान, अच्छे बुनियादी ढांचे और अच्छे कोच चाहते हैं। लोबो ने कहा कि भारत की विशाल आबादी के बावजूद, देश की फुटबॉल टीम छोटे देशों को भी नहीं हरा सकती है और गोवा और भारत के लिए ख्याति लाने वाले खिलाडिय़ों को गोवा के हर गांव में उचित कोचिंग की सुविधा दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, क्रिस्टियानो रोनाल्डो पार्क (Cristiano Ronaldo Park) में आने वाले लोग उनके जैसा बनने और गोवा और भारत के लिए खेलने के लिए प्रेरित होंगे। इस बीच, लोकप्रिय नाइट क्लब, टाइटोस इन कैलंगुट के मालिक, रिकार्डो डिसूजा का कहना है कि इसके बजाय ब्रूनो कॉटिन्हो और समीर नाइक जैसे स्थानीय फुटबॉल आइकन की मूर्तियां स्थापित की जानी चाहिए थीं। उन्होंने कहा, रोनाल्डो की मूर्ति के निर्माण के बारे में सुनकर बहुत निराश हूं। समीर नाइक और ब्रूनो कॉटिन्हो जैसे हमारे अपने आइकन पर गर्व करना सीखें। अनावरण समारोह में, कुछ दक्षिणपंथी प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक पुर्तगाली नागरिक रोनाल्डो की मूर्ति बनाना गोवा का अपमान है, खासकर जब राज्य पुर्तगाली शासन से मुक्ति की 60 वीं वर्षगांठ मना रहा है।