पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम का भी चुनाव शामिल है। 28 नवंबर को यहां वोटिंग होगी। इस बीच ब्रू समुदाय के लोग वोटिंग से अपने पांव पीछे खींच रहे हैं। त्रिपुरा के छह राहत कैंपों में रह रहे 11,000 से ज्यादा मतदाता इसलिए वोट देने नहीं जाएंगे कि पोलिंग बूथ कैंप से काफी दूर हैं। साथ ही साथ भूख और खाने की कमी भी वोटिंग से पीछे हटने की एक वजह है।

बता दें कि 1997 की हिंसा में विस्थापित हुए ब्रू समुदाय के लोग त्रिपुरा के छह राहत कैंपों में सालों से रह रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार के फैसले के बाद यहां 1 अक्टूबर से खाद्य सामग्रियों की सप्लाई बंद कर दी गई है। ऐसे में कैंप में रह रहे लोग भूख से बेहाल हैं। कैंपों में खाने की सामग्री समाप्त हो रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि लोग कैंपों को छोड़ें और अपने-अपने घरों को लौट जाएं। 

मिजोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) के नेता ब्रूनो म्शा कहते हैं, हम चाहते हैं कि त्रिपुरा के इन छह कैंपों में रह रहे लोगों के लिए चुनाव आयोग पोस्टल बैलट से वोटिंग करने की अनुमित दे। बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिन्हें मिजोरम जाकर वोट डालने में दिक्कत है। अब जबकि हमें भूखे रहने पर मजबूर किया जा रहा है, ऐसे में इतनी दूर जाना और मुश्किल भरा होगा। ब्रूना आगे कहते हैं, हमारे लोग भूखे हैं, खाना खत्म हो रहा है। हमारे समुदाय ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पोस्टल बैलट से ही वोटिंग की थी तो इस बार क्या समस्या है?

वहीं, दूसरी ओर चुनाव आयोग का आदेश है कि इस बार त्रिपुरा में रह रहे ब्रू समुदाय के लोगों को मिजोरम में बने पोलिंग बूथों पर जाकर ही वोटिंग करनी होगी। ब्रूना कहते हैं, संभवत: पोलिंग बूथ मिजोरम और त्रिपुरा को बांटने वाले गांव कन्हमुन में बनाए जाएंगे, जोकि बेस कैंप से 20 किलोमीटर और अंतिम कैंप स 70 किलोमीटर दूर है। हमारे लोग भूख में इतनी दूर नहीं जा सकते हैं।

गौरतलब है कि 1997 में हुई हिंसा के बाद मामित, कोलासिब और लुंगलेई जिलों विस्थापित लोगों में से 32,875 लोग त्रिपुरा में बने छह राहत कैंपों में रह रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा इन लोगों को इनके घर वापस भेजने की कोशिश नाकाम रही और सिर्फ चार परिवार अपने घरों को वापस गए, इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा 1 अक्टूबर से इन कैंपों को मिल रही राहत और खाद्य सामग्री रोक दी गई। पिछले 21 सालों से केंद्र सरकार इन लोगों पर वापस जाने और कैंप खाली करने का दबाव बना रही है। वहीं, ब्रू समुदाय के लोग वापस जाने के लिए जमीन और अच्छे पैकेज की मांग कर रहे हैं।  चुनाव की बात करें तो ब्रू समुदाय के लोग राज्य की 40 विधानसभा सीटों में नौ में फैले हुए हैं। त्रिपुरा में रह रहे 11,232 मतदाताओं में से मामित जिले के 8,777 मतदाता, 1732 लोग कोलासिब जिले के और लुगलेई जिले के 723 लोग शामिल हैं।