देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अभी घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि सरकार केवल अंडर-यूटिलाइज्ड एसेट्स को ही बेचेगी। सीतारमण ने यह बात कही नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन को लॉन्च करते हुए कहा कि  इसका हक सरकार के पास ही रहेगा और प्राइवेट सेक्टर के पार्टनर्स को तय समय के बाद अनिवार्य रूप से वापस करना होगा।


कोई जमीन नहीं बेच रहे हैं


सीतारमण ने सफाई देते हुए बताया है कि “ हम कोई जमीन नहीं बेच रहे हैं। नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन में ब्राउनफील्ड एसेट्स की बात कही गई है जिन्हें बेहतर ढंग से मोनिटाइज करने की जरूरत है। ये ऐसे एसेट्स हैं जहां पहले ही निवेश किया जा चुका है। ये ऐसे एसेट्स हैं जो अंडर-यूटिलाइज्ड हैं। निजी भागीदारी से हम इन्हें बेहतर ढंग से मोनीटाइज कर रहे हैं। मोनेटाइजेशन से मिलने वाले संसाधनों को इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग में निवेश किया जाएगा ”।

 ये बेचा जाएगा
वित्त मंत्रालाय ने जारी बयान में कहा कि नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 से 2025 तक 6 लाख करोड़ रुपये के एसेट्स बेचे जा सकते हैं। नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन में सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग, रेलवे, बिजली, पाइपलाइन एवं नेचुरल गैस, सिविल एविएशन, शिपिंग पोर्ट्स एंड वॉटरवेज, टेलिकम्युनिकेशंस, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, माइनिंग, कोल और हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालयों को शामिल किया गया है।