बॉलीवुड एक्टर और राज कपूर के सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर का मंगलवार को हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। राजीव कपूर का करियर कुछ खास नहीं रहा। पिता राज कपूर ने राजीव को बॉलीवुड में लॉन्च किया था, लेकिन बाद में कुछ ऐसा हुआ कि पिता के साथ उनके रिश्ते बिगड़ गए। राजीव कपूर अपने असफल करियर को लेकर पूरी उम्र पिता राज कपूर को कोसते रहे। राजीव कपूर की नाराजगी ऐसी थी कि वह पिता राज कपूर के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे। 

राज कपूर ने बेटे राजीव के लिए साल 1983 में पहली फिल्म एक जान हैं हम बनाई थी। फिल्म में वह लीड हीरो थे, लेकिन यह फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद राज कपूर ने बेटे राजीव को लेकर राम तेरी गंगा मैली फिल्म बनाई, जो सुपरहिट साबित हुई। इस फिल्म का निर्देशन राज कपूर ने किया था। इसमें मंदाकिनी फीमेल लीड रोल में थीं, जिनका किरदार इतना स्ट्रॉन्ग था कि फिल्म में राजीव कपूर का रोल कमजोर पड़ गया। ऐसे में फिल्म की सफलता का श्रेय मंदाकिनी ले गईं। 'राम तेरी गंगा मैली' के सफल होने से मंदाकिनी रातोंरात स्टार बन गईं, लेकिन राजीव कपूर को कोई फायदा नहीं हुआ।

राइटर मधु जैन की किताब 'द कपूर्स' के मुताबिक राजीव कपूर फिल्म में उनका किरदार कमजोर किए जाने के लिए अपने पिता राज कपूर को जिम्मेदार मानते थे। बताया जाता है कि राजीव ने पिता राज कपूर से एक और फिल्म बनाने की अपील की थी। वह चाहते थे कि फिल्म में उनका किरदार दमदार हो, जिससे उनका करियर आगे बढ़ सके, लेकिन राज कपूर ने राजीव के लिए एक और फिल्म बनाने से इनकार कर दिया। इससे में दोनों के रिश्ते में खटास आ गई। राज कपूर ने राजीव को अपनी टीम के असिस्टेंट काम दे दिया था, जिससे उन्हें स्पॉटबॉय तक के काम करने पड़ते थे।

पिता राज कपूर के इस व्यवहार को राजीव को बहुत बुरा लगा था। 'राम तेरी गंगा मैली' के बाद राजीव कपूर ने हम तो चले परदेस, अंगारे, लवर ब्वॉय जैसी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा हाथ लगी। इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं टिक पाई। इसके बाद राजीव पिता को अपनी नाकामी का जिम्मेदार मानने लगे। वह पिता से इस कदर नाराज हुए कि उनके अंतिम संस्कार में भी नहीं गए थे।