फ्रांस में निर्मित पांच राफेल लड़ाकू विमानों को गुरुवार को भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। अंबाला स्थित वायुसैनिक अड्डे पर कल आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी भी भारतीय वायुसेना के इतिहास में दर्ज होने वाली इस बड़ी घटना के अवसर पर उपस्थित रहेंगे। 

इस अवसर पर फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन, फ्रांसीसी वायुसेना प्रमुख एरिक ऑटेलेट, फ्रांसीसी वायुसेना के उप प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। डसॉल्ट एविएशन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रैपीयर और एमबीडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक बेरांगर समेत फ्रांसीसी रक्षा उद्योग के कई अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी इस आयोजन के अवसर पर मौजूद रहेगा। 

अंबाला नौसैनिक अड्डे में राफेल विमान का औपचारिक अनावरण पारंपरिक रूप से आयोजित सर्वधर्म पूजा के साथ किया जाएगा। इस मौके पर राफेल विमान हवाई करतब दिखाएंगे जिसमें तेजस विमान के साथ सारंग एयरोबेटिक टीम भी शामिल होगी। बाद में, राफेल विमान को पारंपरिक तरीके से वाटर कैनन की सलामी दी जाएगी। इसी के साथ ये विमान वायुसेना की 17वीं स्क्वॉड्रन का विधिवत हिस्सा बन जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच एक द्विपक्षीय बैठक भी होगी, जिसमें में भारत एवं फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग विशेष रूप से रक्षा उत्पादन में सहयोग को बढ़ाने के बारे में बातचीत होगी। 

भारत में उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु में रक्षा कॉरीडोर में संयुक्त उपक्रम लगाने के बारे में बात आगे बढ़ने की संभावना है। फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारतीय वायुसेना को पहले बैच में दस राफेल विमान सौंप दिये हैं, जिनमें से पांच विमान गत 29 जुलाई को भारत आ चुके हैं और उन्हें अंबाला एयरबेस में रखा गया है। जबकि पांच विमान अभी फ्रांस में ही हैं और भारतीय पायलटों को उनके परिचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अंबाला में ही राफेल युद्धक विमानों की पहली स्क्वॉड्रन तैनात होगी। वायुसेना की 17वीं स्क्वॉड्रन को ‘गोल्डन-ऐरो’ के नाम से जाना जाता है। इस स्क्वॉड्रन के 18 विमानों में तीन प्रशिक्षण विमान और बाकी 15 लड़ाकू विमान होंगे। 

राफेल की दूसरी स्क्वॉड्रन को पश्चिम बंगाल में हाशिमारा एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। वर्ष 2016 में भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमान खरीदने के लिए सरकार के स्तर पर एक समझौता किया था। युद्ध के लिए हथियारों से लैस इन विमानों की खरीद का सौदा 59 हजार करोड़ रुपये का था। इन 36 विमानों में से 30 लड़ाकू विमान तथा छह दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान हैं। भारतीय वायुसेना में पिछले 23 सालों के दौरान पहली बार नए विमान शामिल होंगे। इससे पहले 1997 में रूस से सुखोई 30 एमकेआई युद्ध विमानों की खरीद की गई थी।