मणिपुर डेवलेपमेंट सोसाइटी में हुए गबन के आरोपों में घिरे मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी ने सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि गबन के आरोप मनगढ़ंत हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। वे जल्द ही इस मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे। 

वहीं कांग्रेस ने प्राथमिकी दर्ज कराने को इबोबी सिंह व दूसरों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी के विधायक एन. लोकेन ने कहा कि यह बहुत अफसोसनाक है कि पूर्व मुख्यमंत्री का नाम इस तरह से दागदार किया जा रहा है। इसमें राजनीतिक प्रतिशोध की भावना दिखती है। उन्होंने कहा कि जांच से पूरा सच सामने आएगा।

बता दें कि पुलिस ने इबोबी सिंह व पांच अन्य के खिलाफ 185.79 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में केस दर्ज किया है। यह केस सरकारी एजेंसी मणिपुर डवलपमेंट सोसायटी (एमडीएस) की निधियों के अपाहरण, सरकारी निधियों के दुरुपयोग व कुप्रबंधन से जुड़ा है। एफआईआर आईपीसी की विभिन्न धाराओं पर पर्सनल लायबिलिटीज एक्ट 1988 के तहत दर्ज की गई है। इबोबी सिंह व पांच अन्य के खिलाफ  धोखाधड़ी, आपराधिक षडयंत्रए विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया है। विश्वासघात गैर जमानती अपराध है। 

इस अपराध में फाइन के साथ या बिना फाइन तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। इबोबी सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। वह तीन बार लगातार मणिपुर के मुख्यमंत्री रहे हैं। एफआईआर में इबोबी सिंह के अलावा, जिन पांच अन्य लोगों के नाम हैं उनमें तीन पूर्व मुख्य सचिव शामिल हैं। ये हैं डीएस पूनिया, पीसी लॉमकुंगा और ओ. नबाकिशोर सिंह। एमडीएस के प्रोजेक्ट डायरेक्ट रह चुके वाई. निंगथेम सिंह और एमडीएस के एडमिनिस्ट्रेटिव एस. जीत सिंह का भी एफआईआर में नाम है। पूनिया और लामकुंगा रिटायर हो चुके हैं जबकि नबाकिशोर अब स्टेट एकेडमी ऑफ ट्रेनिंग के डायरेक्टर हैं। 

पिछले साल मार्च में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्हें मुख्य सचिव के पद से हटा दिया गया था। स्टेट प्लानिंग डिपार्टमेंट में अवर संयुक्त सचिव मुहिन्द्रो सिंह ने इंफाल वेस्ट के पुलिस अधीक्षक थेम्गथिंग एन. को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह एफआईआर स्टेट विजिलेंस कमीशन की ओर से की गई जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर दर्ज करने को कहा गया। स्टेट विजिलेंस कमीशन ने एमडीएस में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की थी। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में 6 का नाम लिया था। 

सभी तीनों पूर्व मुख्यसचिव अपने पदों के प्रभाव के चलते एमडीएस के चेयरमैन थे। इबोबी सिंह 1 जुलाई 2013 से 31 अगस्त 2014 तक एमडीएश के चेयरमैन रहे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री थे। रिपोर्ट के मुताबिक इबोबी सिंह जब एमडीएस के चेयरमैन थे तब वित्तीय अनियमितताएं हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इबोबी सिंह के बयानों को रिकॉर्ड और वैरिफाइड करना होगा। साथ ही रिरपोर्ट में कहा गया है कि सोसायटी के अधिकारियों व स्टाफ ने निर्धारित प्रोसिजर्स और स्थापित नॉम्र्स का पालन नहीं किया। उन्होंने सरकारी निधियों के अपाहरण में मदद की।