असम के अखिल अल्पसंख्यक छात्र संघ ने गोपालपाड़ा पुलिस थाने में थाना प्रभारी और कांस्टेबल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इन पर प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करने का आरोप लगाया गया है। फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई थी जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। ऑल असम माइनोरिटी स्टूडेंट्स यूनियन के गोपालपाड़ा जिला अध्यक्ष अमिनुल हक चौधरी ने रविवार दोपहर एफआईआर दर्ज कराई।

उन्होंने आरोप लगाया कि गोपालपाड़ा पुलिस थाने के प्रभारी दिम्बेश्वर रॉय ने कांस्टेबल अनुप रे को प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का निर्देश दिया था। इसमें याकूब अली की मौत हो गई। बॉर्डर पुलिस और फॉरेनर्स
ट्रिब्यूनल्स की ओर से कथित रुप से डी वोटर्स को कथित रुप से प्रताडि़त करने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने गोपालपाड़ा जिले से 9 किलोमीटर दूर खारबोजा पर राष्ट्रीय राजमार्ग 37 को जाम कर दिया था। ऑल

असम माइनोरिटी स्टूडेंट्स यूनियन ने फायरिंग के विरोध में 10 घंटे के गोपालपाड़ा बंद बुलाया है। एएएमएसयू के महासचिव रेजुल करीम सरकार ने कहा, घटना को 24 घंटे हो गए हैं फिर भी किसी मंत्री ने जिले का दौरा नहीं किया। सरकार ने किसी जांच की घोषणा नहीं की है,इसलिए हम जल्द ही जोरदार आंदोलन लॉन्च करेंगे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कथित रूप से नजरुल इस्लाम ने किया था,जिनको गोलपाड़ा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट के बाहर गिरफ्तार किया गया। इस्लाम और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 147, 148,149, 353 और 325 के तहत गोलपाड़ा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।


सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान 140 लोग एकत्रित हुए। इन्होंने पुलिस को बताया कि वे एक मीटिंग में शामिल होने आए हैं। उन्हें जाम के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, इस्लाम को हाईवे पर जाम की अनुमति नहीं दी गई थी क्योंकि यह बिजी रोड है। इस्लाम ने गुलाम ऑफ अल्लाह नाम से विरोध प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। सत्र मुक्ति संग्राम समिति की गोलपाड़ा यूनिट के अध्यक्ष अमिनुल हक ने कहा कि
अगर इस्लाम लोगों को भड़का रहे थे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

हक ने फायरिंग के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारी और अन्य कर्मियों को सस्पेंड करने की मांग की है। साथ ही सांप्रदायिक सौहार्द के लिए उचित कदम उठाने व पीडि़त परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की है। उधर एआईयूडीएफ के प्रमुख और धुबरी के सांसद बदरुद्दीन अजमल ने सर्किट हाउस में डिप्टी कमिश्नर घनश्याम दास और एसपी अमिताव सिन्हा से मुलाकात की। मीटिंग के बाद अजमल याकूब के घर गए और परिवार को 25 हजार रुपए दिए।

अजमल ने मांग की है कि राज्य सरकार याकूब के परिवार को 10 लाख रुपए बतौर मुआवजा दें। अगर परिवार चाहता है तो वह याकूब की बेवा को नौकरी भी दे सकते हैं। साथ ही याकूब के दो बच्चों की शिक्षा और दीक्षा के लिए गोलपाड़ा के अनाथ आश्रम में रख सकते हैं। अजमल ने घटना की न्यायिक जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। याकूब के परिवार के मुताबिक उसे विरोध प्रदर्शन के बारे में जानकारी नहीं थी। जब वह हाईवे से गुजर रहा था तभी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हो
रहे संघर्ष के बीच फंस गया।