असम की ज्यादातर महिलाएं अपने खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने व सामाजिक सुधारों से ज्यादा आर्थिक आजादी को तरजीह देती हैं। हाल ही में असम सरकार ने एक सर्वे कराया था। इसमें महिलाओं को उन कारकों को चुनने को कहा गया था जिन्हें वे अपने सशक्तिकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानती है।

सर्वे से जो नतीजे आए वे काफी चौंकाने वाले हैं। ज्यादातर महिलाओं ने अपने खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने और समाज सुधारों से ज्यादा तरजीह आर्थिक आजादी को दी। जवाब देने वाली महिलाओं में से 29 फीसदी ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और होम बेस्ड बिजनेसेज के लिए वोट किया। दूसरी सबसे लोकप्रिय पसंद है महिला साक्षरता शिक्षा का विस्तार। 23 फीसदी महिलाओं ने इसके लिए वोट किया। तीसरे स्थान पर थी पूरे राज्य में स्किल्ड वुमन के टैलेंट को खोजना।

इसके लिए 17 फीसदी महिलाओं ने वोट किया। हैरानी की बात यह है कि इंटरनेट के एक्सेस को बढ़ावा देने के पक्ष में किसी ने वोट नहीं किया जबकि इसे पूरी दुनिया में महिलाओं के सशक्तिकरण के सबसे ताकतवर टूल माना जाता है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली सोशल एक्टिविस्ट बोंदिता आचार्य ने कहा, मेरा मानना है कि टेक्नोलॉजी फोबिया कायम है क्योंकि अभी भी संभावनाओं के विशाल फील्ड के बारे में
जागरुकता की कमी है जो इंटरनेट खोलता है। इंटरनेट सिर्फ व्हाट्सऐप और फेसबुक नहीं है। यह इससे कहीं ज्यादा है। उद्यमी बहुत ज्यादा के लिए इंटरनेट को टेप कर सकते हैं और महिलाएं जिनकी उद्यमी बनने की आकांक्षा है, उन्हें इस सच्चाई के बारे में जागरुक होना चाहिए।

उन्होंने सेल्फ डिपेंडेंस पर जोर दिए जाने की तारीफ की और इसे पॉजिटीव डेवलपमेंट बताया। बकौल बोंदिता, सरकार स्वयं सहायता समूहों व अन्य तरीकों से महिलाओं को आर्थिक मदद दे रही है,इसलिए मेरा मानना है कि उन्हें इसे आर्थिक आजादी से रिलेट करना आसान लगा। 5 से 9 फीसदी ने ही सभी मोर्चों पर महिलाओं को डिसीजनमेकर्स की भूमिका दिए जाने के पक्ष में वोट किया। केवल 4 फीसदी वोटर्स का मानना है कि प्राइमरी हेल्थकेयर व सैनिटेशन का आसानी से एक्सेस फाइनेंशियल सेल्फ डिपेन्डेंस के लिए महत्वपूर्ण है। सिर्फ 2 फीसदी महिलाएं मानती है कि खेलों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित कर महिलाओं को सशक्त किया जा सकता है। एडवांस्ड जेंडर जस्टिस और वुमन सिटीजनशिप के विस्तार को लेकर भी महिलाओं की कुछ यही राय है।