मोदी सरकार ने सख्त फैसले लेने के मामले में अपनी अलग पहचान बना ली है। इसी के तहत इस बार के बजट में भी मोदी सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है। इन दिनों वित्त मंत्रलय के गलियारे में काफी चर्चा है। मोदी सरकार विरासत की संपत्ति यानी एस्टेट ड्यूटी दूसरे शब्दों में कहें तो इनहेरिटेंस टैक्स दोबारा लगा सकती है। इस टैक्स को 1985 में खत्म कर दिया गया था। सरकार इसी बजट में इसकी घोषणा कर सकती है। सरकार ने इसके लिए मसौदा तैयार कर लिया है। गिफ्ट या पैतृक संपत्ति पर लगने वाले टैक्स को इनहेरिटेंस टैक्स कहते हैं।

नाम न छापने की शर्त पर वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि, मोदी सरकार जनता की भलाई के लिए जानी जाती है। इस समय इनहेरिटेंस टैक्स लगाने का बेहतर मौका है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि जिन लोगों ने स्कूल, यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों को दान किया है, उन्हें कुछ छूट की पेशकश की जा सकती है। इसमें उन्होंने उच्च शिक्षा के मामले में अमेरिकी मॉडल का हवाला दिया।

आपको बता दें कि इस समय जीएसटी टैक्स कलेक्शन के जो आंकड़े आये हैं, उसमें जीएसटी संग्रह काफी कम है। ऐसे में सरकार के सामने पैसे कमाने की कड़ी चुनौती है। सरकार के इस फैसले हो सकता है कि कुछ लोग टैक्स से बचने के लिए दूसरे देशों का रूख कर सकते हैं। इनहेरिटेंस टैक्स को लागू करना भी बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि भारत जैसे देश में जिन लोगों की पैतृक संपत्ति है, हो सकता है कि उसके पास टैक्स जमा करने के लिए पैसे ही न हो। ऐसे में टैक्स जमा करने के लिए संपत्ति बेचनी पड़ सकती है। हालांकि इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने दबी जुबान से कहा कि, अमीरों पर टैक्स लगाना कठिन है, लेकिन इसे लागू करना आसान है।

दूसरी चुनौती ये है कि हो सकता है कि लोग अपनी संपत्ति के भुगतान से बचने के लिए ट्रस्टों के तहत अपनी संपत्ति को शामिल कर लें। इनहेरिटेंस टैक्स पर सरकार ने पहले भी चर्चा की थी, इसे लागू नहीं कर पाई थी। ट्रांजेक्शन स्कॉयर के संस्थापक गिरीश वनवारी ने कहा कि, कंपनियों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और मुख्य शेयरधारकों ने बजट से पहले सर्वे में संकते दिया था कि भारत अभी तक इनहेरिटेंस टैक्स के लिए तैयार नहीं है। मोदी सरकार को अपने राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए नए संसाधनों की तलाश करनी होगी।