मणिपुर के मशहूर फिल्मकार अरिबन श्याम शर्मा ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में पद्मश्री पुस्कार लौटा दिया है। उन्होंने कहा कि मैंने एकजुटता दिखाने के लिए यह पुरस्कार लौटाने का फैसला लिया। अरिबन श्याम शर्मा ने कहा कि मणिपुर के लोगों को इस समय सुरक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 500 से ज्यादा सदस्यों वाले लोकसभा में राज्य के सिर्फ एक या दो सदस्य हैं। शर्मा ने कहा कि ऐसे में संसद के भीतर देश के उत्तर पूर्वी हिस्से की आवाज कैसे उठेगी।

82 साल के फिल्मकार अरिबम श्याम शर्मा ने कहा कि एक राज्य के नाते मणिपुर का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आबादी के आधार पर आंकलन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को इसलिए उठा रहे हैं, क्योंकि केंद्रीय सरकार इन्हीं राज्यों से मिलकर बनती है। शर्मा ने कहा कि उत्तर पूर्वी राज्य संयुक्त रूप से जब कोई चीज सरकार के सामने पेश करें, तब उसे उसपर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ऐसा नहीं करेगी तो स्वाभाविक है कि हम विरोध जताएंगे। मणिपुरी सिनेमा और फिल्मी जगत में अहम योगदान देने के लिए 2006 में अरिबन श्याम शर्मा को पद्मश्री पुस्कार से नवाजा गया था।

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से 8 जनवरी को पास हुआ था। इस विधेयक के पास होने के बाद से मणिपुर में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बड़े पैमाने पर लोगों ने इसके खिलाफ आंदोनल छेड़ दिया है और इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यह विधेयक जुलाई, 2016 में संसद में पेश किया गया था। इसके तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। पड़ोसी देशों के मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। विधेयक में प्रावधान है कि गैर-मुस्लिम समुदायों के लोग अगर भारत में 6 साल गुजार लेते हैं तो वे आसानी से नागरिकता हासिल कर पाएंगे। पहले इसकी सीमा 11 साल थी।