पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम (Pakistan’s nuclear programme) के जनक कहे जाने वाले अब्दुल कादिर खान (Abdul Qadeer Khan) का निधन हो गया है। खान ने 85 साल की उम्र में इस्लामाबाद के केआरएल अस्पताल में अंतिम सांस ली। फेफड़ों की समस्या के साथ इस्लामाबाद के खान रिसर्च लेबोरेटरीज (केआरएल) अस्पताल में स्थानांतरित होने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।


अब्दुल कादिर खान (Abdul Qadeer Khan) को अगस्त में इसी अस्पताल में कोविड-19 के साथ भर्ती कराया गया था। उन्हें घर भेज दिया गया था लेकिन उनकी हालत बिगड़ने पर वापस अस्पताल ले जाया गया। देश को दुनिया की पहली इस्लामी परमाणु शक्ति (Islamic nuclear power) में बदलने के लिए खान को पाकिस्तान में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मानित किया जाता है।


वह 2004 में एक वैश्विक परमाणु प्रसार घोटाले के केंद्र में था जिसमें उत्तर कोरिया, ईरान और लीबिया को परमाणु रहस्यों की बिक्री शामिल थी। राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक स्वीकारोक्ति के बाद, खान को तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने माफ कर दिया था, लेकिन वह घर में नजरबंद रहे।


अपने कबूलनामे में, खान ने कहा कि उसने राज्य के अधिकारियों की जानकारी के बिना अकेले काम किया। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया था। खान का जन्म 1936 में तत्कालीन अविभाजित भारत के भोपाल में हुआ था। बाद में, वह अपने परिवार के साथ 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे।

पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान (Pakistani Prime Minister Imran Khan) ने कहा कि वह "डॉ एक्यू खान के निधन से बहुत दुखी हैं"। प्रधान मंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर कहा कि "हमें परमाणु हथियार संपन्न देश बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें हमारे देश ने प्यार किया था। इसने हमें एक आक्रामक बहुत बड़े परमाणु पड़ोसी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की है। पाकिस्तान के लोगों के लिए वह एक राष्ट्रीय प्रतीक थे, ”।