लाल किले में प्रवेश करने वाले किसानों को एक गुंबद के शीर्ष पर एक झंडा लगाते देखा गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक प्रदर्शनकारी ने लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराया है। बता दें कि एक किसान की परेड के दौरान ट्रैक्टर पलटने से उसकी मौत हो गई। किसानों ने दावा किया है कि उसे गोली मार दी गई थी। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले हजारों किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तरह का पहला ट्रैक्टर परेड शुरू किया था।


दिल्ली पुलिस द्वारा इस आयोजन के लिए 5000 टैक्टर की अनुमति दी गई थी लेकिन किसानों ने लगभग 2 लाख टैक्टर किले के परिसर में प्रवेश कराए। देल्ही के मुकरबा चौक पर सुरक्षाकर्मियों ने किसानों के समूहों के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया चूंकि उन्होंने दिल्ली के मुकरबा चौक पर ट्रैक्टरों के साथ बैरिकेड्स और सीमेंटेड बैरियर तोड़ने की कोशिश की थी। जबकि किसानों की यूनियनों को दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर परेड आधिकारिक गणतंत्र दिवस के समापन के बाद ही शुरू करने को कहा था।


सिंघू, टिकरी और गाजीपुर में शिविर लगाकर किसानों ने अपने ट्रैक्टरों पर राष्ट्रीय राजधानी में मार्च करना शुरू कर दिया। सुरक्षाकर्मियों ने किसानों को तय योजना पर अड़े रहने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने और मजबूर होकर शहर का रुख किया। झंडे गाड़ने वाले ट्रैक्टरों को पुरुषों और महिलाओं के साथ ढोलों पर नाचते हुए और सड़क के दोनों ओर स्थानीय लोगों को घुड़सवारों पर पंखुड़ियों की बौछार करते देखा गया। किसानों ने देश में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया।