नरेन्द्र मोदी सरकार के कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन कानूनों का गुरुवार को दिल्ली विधानसभा में जमकर विरोध हुआ और सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों के सदन में कानून की प्रतियां फाड़ने से हंगामा हो गया। दिल्ली विधानसभा का आज एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। 

सत्र की शुरुआत में ही परिवहन और पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने एक संकल्प पत्र पेश किया, जिसमें तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की बात कही गई। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्तारुढ़ दल के महेंद्र गोयल और सोमनाथ भारती ने सदन में कृषि कानून की प्रतियां फाड़ी और जय जवान, जय किसान के नारे लगाते हुए कहा कि जो कानून किसानों के पक्ष में नहीं हैं, उसे स्वीकार नहीं करेंगे। आप पार्टी कृषि कानूनों के पक्ष में आंदोलनरत किसानों के साथ नजर आ रही है। पार्टी तीनों कानून को किसानों के खिलाफ बताकर इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग कर रही है।

वहीं दिल्ली विधानसभा में सीएम केजरीवाल ने कहा, 20 से ज्यादा किसान इस आंदोलन में शहीद हो चुके हैं. रोज एक किसान शहीद हो रहा हैं. मैं केंद्र सरकार से पूछना चाहता और कितनी शहादत और कितनी जान आप लोगे? आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने कहा, 1907 में हूबहू ऐसा ही आंदोलन हुआ था, 9 महीने तक ये आंदोलन अंग्रेज़ों की खिलाफ चला था। उस आंदोलन की लीडरशिप भगत सिंह के पिता और चाचा ने की थी। उस वक्त भी अंग्रेज सरकार ने कहा था इसमें थोड़े बदलाव कर देंगे, लेकिन किसान डटे रहे. भगत सिंह ने भी क्या इसीलिए कुर्बानी दी थी कि आजाद भारत में किसानों को इस तरह आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, केंद्र का कहना है कि किसान को कानून समझ नहीं आ रहा, आज योगी आदित्यनाथ यूपी में बड़ी रैली कर रहे हैं, मैं सुन रहा था, वो कह रहे हैं तुम्हारी जमीन नहीं जाएगी, मंडी बन्द नहीं होगी ये फायदा है क्या? किसी से पूछो तो एक लाइन रटा रखी है किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं।