किसान आंदोलन बहुत तेज होता जा रहा है। केंद्र सरकार कृषि कानून रद्द करने को तैयार नहीं है और किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। अब अब तक इन कानूनों का विरोध करते करते कई किसानों की मौत हो गई है। साथ ही कई किसानों ने आत्महत्या भी कर ली है। हाल ही में दिल्ली सिंघू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में एक 40 वर्षीय किसान ने कथित रूप से कुछ जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। अमरिंदर सिंह के रूप में पहचाने जाने वाला किसान पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी था।


पुलिस ने बताया कि उस व्यक्ति को गंभीर हालत में सोनीपत के फ्रैंक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (FIMS) ले जाया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। देश के विभिन्न हिस्सों के किसान, जिनमें से ज्यादातर पंजाब और हरियाणा से हैं, दिल्ली के विभिन्न सीमा बिंदुओं पर एक महीने से अधिक समय से डेरा डाले हुए हैं और तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। यह राजधानी की सीमाओं पर प्रदर्शनकारियों के बीच चौथी आत्महत्या है। पहला हरियाणा के करनाल जिले के धार्मिक नेता 65 वर्षीय संत बाबा राम सिंह का था।


उन्होंने खुद को किसानों की दुर्दशा से पीड़ित बताते हुए कुंडली के पास गोली मार दी थी। दूसरा पंजाब के फाजिल्का जिले के 63 वर्षीय वकील अमरजीत सिंह राय का था, जो टिकरी विरोध स्थल पर कीटनाशक का सेवन करने के बाद मर गए थे। 3 जनवरी को, उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक 70 वर्षीय किसान ने दिल्ली-यूपी सीमा के पास गाजीपुर विरोध स्थल पर आत्म हत्या कर ली थी। एक कथित सुसाइड नोट में, उन्होंने लिखा कि वह "खेत के बिल का विरोध करने के लिए" कदम उठा रहा था। बता दें कि हरियाणा के कनाल जिले में  सीएम मनोहरलाल खट्टर की महापंचायत में किसान और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई जिससे पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस दागी और ठंडे पानी की बौछार की।