बेशक मई-जून महीने की गर्मी बाहर निकलने से रोकती है लेकिन घूमने-फिरने वालों के लिए ये बहुत बड़ा चैलेंज नहीं होता। तो अगर आप भी इस गर्मी में घूमने का साहस रखते हैं तो एक नज़र डालें यहां। जहां होने वाले अनोखे फेस्टिवल में शामिल होकर आप कर सकते हैं भरपूर एन्जॉय। 

कृषि से जुड़ा ये फेस्टिवल नागालैंड की एक जनजाति द्वारा मनाया जाता है। जिसमें डांस, गाने के साथ ही शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रम भी होते हैं। सबसे खास होता है सांगपांगतू। जिसमें पुरुष और महिलाएं नए-नए कपड़ों में तैयार होकर आग के किनारे बैठकर मीट और वाइन का आनंद लेते हैं। ये फेस्टिवल मई के पहले हफ्ते में मनाया जाता है। 

केरल के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है त्रिशूर पूरम। जिसमें खासतौर से भगवान शिव की पूजा होती है। त्रिशूर पूरम महोत्सव अप्रैल के महीने में केरल के प्रसिद्ध मंदिर वड़कुंकनाथ में मनाया जाता है। साल में एक बार मनाए जाने वाले इस त्‍योहार को देखने देश-विदेश से लोग आते हैं। 36 घंटे की लंबी पूजा के दौरान शानदार आतिशबाजी होती है। इतना ही नहीं यहां पर रंगों, संगीत और भक्ति का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस दौरान करीब 50 सजे-धजे हाथी ड्रम की आवाज पर थिरकते हुए सड़कों पर निकलते हैं। जो अद्भुत दृश्य होता है। ये त्यौहार थ्रिसूर केरल के वड़कुंकनाथ मंदिर में 13 मई को मनाया जाता है। 

हिडिंबा देवी के जन्मोत्सव पर हर साल 14 से 16 मई तक इस मेले का आयोजन होता है। तीन दिनों तक मनाए जाने वाले इस उत्सव के दौरान मनाली का नज़ारा बहुत ही खूबसूरत होता है। इस दिन जुलूस निकाला जाता है जिसमें सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल होती हैं। स्थानीय लोगों द्वारा लोक नृत्य किया जाता है। मनाली ही नहीं आसपास के गांवों में भी बड़ी ही धूमधाम के साथ ये त्योहार मनाया जाता है। 14 से 16 मई तक मनाए जाने वाले इस उत्सव के लिए आपको हिमाचल के मनाली में हडिंबा मंदिर जाना होगा। 

ऊटी तमिलनाडु का बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है और समर फेस्टिवल के दौरान तो ये और भी खूबसूरत हो जाता है। जिसमें गुडालूर का स्पाइस शो, कोटागिरी के नेहरू पार्क का वेजिटेबल शो,  गर्वनमेंट रोज़ गार्डन का रोज़ शो, कुन्नूर के सिम पार्क का फ्रूट शो और ऊटी के बोटेनिकल गार्डन का फ्लॉवर शो सबसे खास होता है। ये समर फेस्टिवल 17 से 21 मई के बीच मनाया जाता है। 

माउंट आबू के समर फेस्टिवल में आकर आप लोक नृत्य और संगीत का जबरदस्त तालमेल देख सकते हैं। इसके अलावा नक्की लेक पर बोट रेसिंग और रोलर स्केटिंग रेस जैसी और भी कई सारी एक्टिविटीज होती है। भारत के कोने-कोने से आए कलाकारों द्वारा पेश की जाने वाली शाम-ए-कव्वाली समां बांधने का काम करती है। इसका आनंद लेने के लिए आपकोे 17 और 18 मई को यहां मौजूद रहना होगा।