पुलिस के सख्त पहरे से परेशान उत्तर प्रदेश में हाथरस के बूलगढ़ी गांव के लोगों ने जिला प्रशासन पर दबंगई का आरोप लगाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ पुलिस प्रशासन ने धक्का मुक्की की, जिसके विरोध में धरना शुरू हो गया। 

ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने उन्हे घरों में कैद कर दिया है और उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिये हैं। पीड़िता के परिजनो को बाहर निकलने से मनाही है। पुलिस और प्रशासन के खौफ से ग्रामीण सहमे हुये हैं। पुलिस की नजरों से बचकर गांव से बाहर निकले एक ग्रामीण ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिये है। 

अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण पीड़ित के परिवार और प्रशासन के बीच की बातचीत सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं। पीड़ित ग्रामीण ने बताया कि पीड़िता के परिजन मीडिया से बात करना चाहते है, जिसकी इजाजत जिला प्रशासन उन्हें नहीं दे रहा है। पीड़िता के एक परिजन को एक प्रशासनिक अधिकारी ने लात मार दी, जिससे वह चंद सेकेंड के लिये मूर्छित हो गये। उसने बताया कि जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने पीड़िता के परिजनो को पत्रकारों से कुछ भी बताने से मना किया है और कहा है कि यह सब पत्रकार कुछ समय बाद वापस चले जायेंगे और फिर जिला प्रशासन ही उनकी खैर खबर रखेगा। इसलिये अच्छा है कि प्रशासन के साथ मिलकर चलें। 

उधर, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गांव में जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हे रोक दिया। इसको लेकर उनकी पुलिस अधिकारियों से नोकझोंक हुयी। इस बीच एक अधिकारी ने उन्हें धक्का दे दिया और वह जमीन पर गिर पड़े। घटना के बाद सभी नेता वहीं धरने पर बैठ गये। तृणमूल की नेता ममता ठाकुर ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। इस बीच मीडिया कर्मियों ने भी जिला प्रशासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ धरना दे दिया है।