असम के कोकराझार शहर से दूर दराज मरसुलझारा तहसील के भीतरी गांव नलपानी में कई महीनों से बीमार पड़ी 28 वर्षीय विधवा आकाली राभा बाल बच्चे के लालन पालन की चिंता में जब बड़बड़ाने लगी तो परिवार के लोगों को लगा की उस पर प्रेतात्मा का साया सवार हो गया हैं और फिर अपने ही लोगों ने उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

दरअसल असम का कोकराझार जिला बोड़ो-राभा जनजाति बहुल क्षेत्र के अंतर्गत आता हैं। इसी जनजाति से ताल्लुक रखने वाली आकाली राभा नाम के पति की मौत हो चुकी है। करीब 3/4 महीनों से अपने परिवार बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी आकाली राभा के ऊपर आ गई, पर वह इस जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा पा रही थी और परिवार के खर्चे वहन ना कर पाने के गम में वह आये दिन परेशान रहा करती थी।

हालांकि असम के जनजाति समाज की महिलाएं भी मर्दो के साथ कंधे से कंधे मिलाकर काम करती हैं पर लम्बी कमजोरी और मानसिक असंतुलन होने से आकाली राभा ने बड़बड़ाना शुरू कर दिया था, जिसे देख परिवार के अन्य लोगों ने उस पर प्रेत आत्मा का साया पड़ने का शक जाहिर किया। मानसिक कष्ट झेल रही आकाली राभा को उल जुलूल हरकतें करने पर उसके परिवार के लोगों ने मछली पकड़ने वाले जाल से पकड़कर 24 घंटे तक बंधक कर रखा था।

गांव के लोगों को उसके चीख पुकार सुन और उसके बच्चों को रोते बिलखते देख जब मामला समझ आया, तो किसी ने पुलिस बुला लिया और मौके से पुलिस ने महिला को मुक्त कराया और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। आकाली राभा ने मीडिया के सामने माना की उसके परिवार के लोगों ने ही उस पर भूत का साया पड़ने के संदेह में मछली पकड़ने वाली जाल से बांधकर 24 घंटे से बंधक बना कर रखा था। कोकराझार जिला के मरसुलझारा तहसील पुलिस के एसडीपीओ प्रभात के अनुसार नलपानी गांव की रहनेवाली 28 वर्षीय महिला आकाली राभा अन्धविश्वास का शिकार अपने ही परिवार के हाथों हुई है।