बंदरिया की मौत के बाद एक परिवार ने उसके बच्चे को इतना प्यार दिया कि अब वह उन्हें छोड़ कर जाने को तैयार नहीं है। इस छोटे बंदर को वन विभाग की टीम दो बाद जंगल में छोड़कर आ चुकी हैं, लेकिन उसे तो यही अपना परिवार लगता है, इसलिए वह दोनों बार फिर घर लौट लाया है। अब परिवार के लोग इस बंदर के बच्चे की देखरेख कर रहे हैं। 

क्षेत्रवासियों ने बताया कि दिग्रस गांव में एक दिन बंदरों की टोली आई थी। इस दौरान कुछ कुत्ते एक बंदरिया के पीछे पड़ गए, जिससे डरकर वह खंभे पर चढ़ गई, जहां करंट लगने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद बंदरिया का बच्चा उसे लिपटकर जोर जोर से आवाज लगा रहा था, लेकिन कुत्ते उस पर हमला करने का मौके देख रहे थे। इसी समय गांव में रहने वाले रवि विलायतकर वहां से गुजर रहे थे, उन्होंने बंदरिया के बच्चों उठाया और अपने साथ घर ले गए। 

विलायतकर की पत्नी वच्छला ने इस बच्चे की देखभाल शुरु की है। अब बंदर वच्छला को छोडऩे के लिए तैयार नहीं है। बंदरिया के बच्चे को घर पर लाने के बाद दोनों पति-पत्नी ने उसका ख्याल रखा लेकिन सुबह होते ही बंदरों की टोली उनके घर पर पहुंची। रवि ने बंदरों को टोली को घर से निकाल दिया, और छोटे बंदर को लेकर वन विभाग के पास पहुंचे। वन विभाग को पास बंदर को जंगल में छोड़ आए लेकिन बंदर का बच्चा वापस आ गया। ऐसा दो बार हो चुका है।अधिकारियों ने रवि से कहा कि, इसे वापस अपने घर ले जाए, और इसकी अच्छा ख्याल रखें। यह बंदर अब विलायतकर परिवार का सदस्य बन गया है। वच्छला अपने बच्चे जैसा प्यार इसको कर रही है।