आजादी के इतने सालों बाद भी शहीद हेमराम पात्र आैर गुणाभिराम बरदलै के परिवार सरकारी सहायता से वंचित हैं आैर गरीबी के साथ दुखमय जीवन बिताने पर मजबूर हैं। 

देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के वाले रोहा बारहपुजिया के दो वीर शहीद हेमराज आैर गुणाभिराम बरदलै के परिवार आज रिक्शा चलाकर आैर दिन दिहाड़ी कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाते हैं।

रोहा से करीब पांच किमी दूर स्थित बारहपुजिया पंच शहीदों की पुण्य भूमि है। इन पंच शहीदों के अन्यतम शहीद हैं हेमराज पात्र आैर गुणाभिराम बरदलै। 1942 में भारत छोड़ों आंदोलन के समय रोहा जोंगालबलहु गढ़ स्थित ट्रक रोड के पुल जलाने गए हेमराज आैर गुणाभिराम बरदलै ने ब्रिटिश सरकार की गोलियां खाकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

लेकिन देश की अाजादी के इतने सालों बाद भी गरीब परिवारों को केंद्र आैर राज्य सरकारों से कोर्इ सहायता नहीं मिली है। जिसकें चलते इन दोनों गरीब परिवाराें को दो वक्त की रोटी की चिंता सताती रहती है। 

स्थानीय जनता ने सरकार के इस रवैये के प्रति नाराजगी जतार्इ है। जनता के साथ विभिन्न दल संगठनों ने भी इन परिवारों को सभी प्रकार की सहायता देने की मांग की है।