इराक के प्रधामंत्री मुस्तफा अल-कदीमी के (Drones have attacked the residence of Iraq's Prime Minister Mustafa al-Kadhimi) आवास पर ड्रोन पर हमला किया गया है. ड्रोन में विस्फोटक पदार्थ भरा हुआ था जिससे पीएम आवास पर धमाका किया गया है. हालांकि इस हमले में पीएम अल-कदीमी (PM al-Kadhimi narrowly escaped in this attack) बाल बाल बच गए लेकिन कुछ लोग घायल हो गए. यह हमला रविवार सुबह किया गया. 

इराकी सेना (Iraqi military) ने इसे प्रधानमंत्री की हत्या की कोशिश बताया है. अल अरबिया की ख़बर के मुताबिक, इस हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं. इस घटना के बाद इराकी सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि यह हमला कदीमी के बगदाद स्थिति आवास के ग्रीन जोन को निशाना बनाकर किया गया. सेना ने इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं दी है.

दो अन्य सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, कदीमी के आवास पर विस्फोटक से(Kadimi's residence was attacked with an explosive-laden drone)  भरे ड्रोन से हमला किया गया. दोनों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि हमले में प्रधानमंत्री कदीमी बाल-बाल बच गए हैं. वहीं, कदीमी ने हमले के बाद ट्वीट किया, "देशद्रोह के रॉकेट वीर सुरक्षा बलों की दृढ़ता और दृढ़ संकल्प को हिला नहीं पाएंगे। मैं ठीक हूं और अपने लोगों के बीच हूं। ईश्वर का शुक्र है." उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है. फिलहाल इराकी प्रधानमंत्री के आवास पर हमला करने की जिम्मेदारी किसी समूह ने नहीं ली है. बता दें कि प्रधानमंत्री आवास के ग्रीन जोन इलाके में सरकारी इमारतें और विदेशी दूतावास हैं. यहां रहने वाले पश्चिमी देशों के राजदूतों ने बताया कि उन्होंने धमाकों और गोलीबारी की आवाज सुनी. 

बता दें कि पीएम के आवास पर विस्फोट की ये घटना सुरक्षा बलों और ईरान समर्थक शिया मिलिशिया के बीच गतिरोध के बीच हुई है. बीते महीने आए इराक के संसदीय चुनाव के परिणाम को शिया मिलिशिया ने खारिज कर दिया है और लगभग एक महीने से ग्रीन जोन के बाहर डेरा डाले हुए हैं. विरोध शुक्रवार को उस समय घातक हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने ग्रीन जोन की ओर मार्च किया जिसमें सुरक्षा बलों और शिया मिलिशिया के बीच गोलीबारी शुरु हो गई. इस दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई. जिसमें कई दर्जन सुरक्षा बल घायल हो गए थे.

अल-कदीमी ने यह निर्धारित करने के लिए जांच का आदेश दिया कि झड़पों को किसने भड़काया और किसने गोलीबारी नहीं करने के आदेशों का उल्लंघन किया. बता दें कि अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य ने 10 अक्तूबर को हुए चुनाव की प्रशंसा की. क्योंकि ये चुनाव ज्यादातर हिंसा मुक्त और बिना किसी बड़ी तकनीकी गड़बड़ी के संपन्न हुआ था.