एक्सपर्ट्स ने सलाह जारी की है कि 30 साल से कम उम्र वाले Oxford vaccine का टीका नहीं लगवाएं। इस वैक्सीन को अब युवाओं के लिए खतरनाक बताया जा रहा है. वैक्सीनेशन और इम्यूनाइजेशन के लिए बनी ब्रिटेन की ज्वॉइंट कमिटी (JCVI) ने कहा कि ब्लड क्लॉट्स के हल्के साइड इफेक्ट के चलते संभव हो सके तो 30 साल के कम उम्र के लोगों को ये वैक्सीन देने से बचना चाहिए।

JCVI के वेइ शेन लिम ने कहा, 'उपलब्ध डेटा और साक्ष्यों के आधार पर कमिटी की ये सिफारिश है कि 30 साल से कम उम्र के लोग जिन्हें हेल्थ से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, संभव हो सके तो उन्हें ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की बजाए कोई अन्य वैक्सीन दी जाए।'

उन्होंने कहा कि युवाओं में हॉस्पिटलाइजेशन का खतरा बहुत कम था। ऐसे में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका शॉट के खतरे-फायदे का कैलकुलेशन बताता है कि वयस्कों के लिए बाकी वैक्सीन इससे ज्यादा बेहतर थीं। लिम ने आगे कहा, 'हम किसी व्यक्तिगत या किसी खास एज ग्रुप को कोई वैक्सीन शॉट लेने के लिए पूरी तरह इनकार नहीं कर रहे हैं। हम केवल सुरक्षा कारणों से एज ग्रुप के आधार पर किसी अन्य वैक्सीन को तरजीह देने की बात कर रहे हैं।'

हालांकि लिम ने ये भी कहा कि जिन लोगों को एस्ट्राजेनेका का पहला शॉट लग चुका है, उन्हें दूसरा शॉट भी इसी वैक्सीन का लगना चाहिए। बता दें कि शुरुआत से ही हेल्थ एक्सपर्ट दो अलग-अलग वैक्सीन के शॉट लेने की गलती से बचने की सलाह दे रहे हैं।

ये पूरा मामला तभी से जोर पकड़ रहा है जब ब्रिटेन के MHRA मेडिसिन रेगुलेटर ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित शॉट के संभावित साइड-इफेक्ट का पता लगाया, जिसमें ब्रेन ब्लड क्लॉटिंग जैसे साइड इफेक्ट भी शामिल हैं। ब्रिटेन और यूरोप दोनों के मेडिसिन रेगुलेटर्स ने पहले अपने बयान में वैक्सीन से बढ़ने वाली ब्लड क्लॉट की समस्या को खारिज किया था।

हालांकि, दोनों देशों के रेगुलेटर्स अब छोटी संख्या में ब्रेन ब्लड क्लॉट्स की रिपोर्ट की जांच कर रहे हैं, जिसे सेरेब्रल वेनस साइनस थ्रॉम्बोसिस (CVST) के रूप में जाना जाता है। ये शॉट लगने के बाद लोगों में ब्लड प्लेटलेट्स का लेवल असामान्य रूप से प्रभावित होता है।

डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर जोनाथन वैन-टैम ने कहा, 'इस कदम से ब्रिटेन में वैक्सीन के रोलआउट की गति पर बहुत थोड़ा सा असर पड़ेगा।' यहां बुधवार को ही मॉडर्ना का शॉट रोलआउट हुआ है, जबकि फाइजर का टीका भी लगाया जा रहा है।

कोरोना वायरस के पूरी दुनिया में अब तक 13 करोड़ 45 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इस भयंकर महामारी से अब तक 29 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। worldometers की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 10 करोड़ 83 लाख से ज्यादा लोग रिकवर हो चुके हैं।