पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित किए गए उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय (Kishore Upadhyay joins BJP) भाजपा में शामिल हो गए हैं। उपाध्याय को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव (Devendra Yadav) के भेजे पत्र में लिखा गया था कि चूंकि आप लगातार कई चेतावनियों के बावजूद पार्टी विरोधी गतिविधियों में खुद को शामिल कर रहे हैं, इसलिए आपको तत्काल प्रभाव से कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाता है। इसके बाद उपाध्याय ने भगवा पार्टी का दामन थाम लिया है। सूत्रों के अनुसार उपाध्याय को टिहरी विधानसभा सीट (Tehri assembly seat) से टिकट मिल सकता है। उपाध्याय ने यहां 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी। उपाध्याय के निष्कासन के बारे में पूछे जाने पर उत्तराखंड कांग्रेस महासचिव (संगठन) मथुरा दत्त जोशी (Mathura Dutt Joshi) ने बताया कि उपाध्याय एक वरिष्ठ सदस्य थे और पार्टी ने उन्हें कई महत्वपूर्ण पद दिए थे। हालांकि, कई चेतावनियों के बावजूद, उपाध्याय ने अन्य राजनीतिक संगठनों के साथ संबंध बनाना जारी रखा। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

बता दें कि उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार में मंत्री उपाध्याय को पहले हरीश रावत (Harish rawat) के करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि रावत ने 2014 में उपाध्याय को राज्य कांग्रेस प्रमुख के रूप में पदोन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, इसके तुरंत बाद दोनों नेताओं के बीच मनमुटाव सामने आया। साल 2017 में उपाध्याय (Kishore Upadhyay) को उनकी पारंपरिक टिहरी सीट से टिकट देने से इनकार कर दिया गया था। उन्हें इसके बजाय देहरादून के सहसपुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया था। उपाध्याय सहसपुर निर्वाचन क्षेत्र से हार गए और 70 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कांग्रेस केवल 11 सीटों पर सिमट गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद उपाध्याय की जगह प्रीतम सिंह को नए राज्य कांग्रेस प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि उनके पास अभी भी टिहरी जिले में एक मजबूत वोट आधार है।