मानसून की दस्तक के साथ ही असम फिर से बाढ़ की चपेट में आ गया। इस साल आए बाढ़ में अबतक मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गयी है। राज्य में बाढ़ से स्थिति गंभीर बनी हुई है और इससे अबतक चार लाख 25 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। राज्य के सात जिले बाढ़ की गंभीर स्थिति से प्रभावित हैं।

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असम के विकास में बाढ़ सबसे बड़ी दीवार है। हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से हजारों लोग बेघर, सैकड़ों लोग व वन्य जीवों की मौत और फसलों की बर्बादी होती है। जिसका नुकसान राज्य को भुगतना पड़ता है। बारिश और इसके बाद नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से उत्पन्न बाढ़ के कारण राज्य को हर साल करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान होता है।


असम में मानसून में बारिश और उससे ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को होता है, क्योंकि उसकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। जब कभी भंयकर सैलाब आता है तो उसके साथ अकाल और गरीबी भी साथ आता है। क्योंकि किसान की अर्थव्यवस्था पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था डिपेंड करता है। अनाज एवं सब्जियों में सब्जियों की भारी किल्लत हो जाती है और दाम भी आसमान छूने लगता है। बाढ़ के कारण सड़क एवं सरकारी संपत्तियों का भारी नुकसान होता है जिसे सही करने में सरकार को भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या सात हुई


साल 2017 में बाढ़ से राज्य में कम से कम 85 लोगों की मौत हो गई थी। लगभग 4 लाख लोग प्रभावित हुए थे, हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा था। वहीं 60 से ज्यादा जानवरों की मौत हो गई थी। इस बाढ़ में असम सरकार की ओर से 128 रिलीफ कैंप बनवाए गए थे।साल 2016 में 1.8 मिलियन लोग प्रभावित हुए थे, 28 से ज्यादा लोगों की मौत बाढ़ की वजह से हुई थी। जुलाई 2016 में असम में 60 प्रतिशत अधिक बारिश हुई थी। इस वजह से राज्य बाढ़ की चपेट में आ गया था। बाढ़ ने 200000 हेक्टेयर की फसल को प्रभावित किया था। बाढ़ की वजह से राज्य में चाय की 21-30 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचा था।

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2015 के बाढ़ में 42 लोगों की मौत हुई थी। इस बाढ़ में 21 जिलों के 1.65 मिलियन लोग, 2100 गांव और करीब 180000 हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई थी। बता दें कि राज्य में 1950 के बाद से 12 विनाशकारी बाढ़ आए हैं। जिसमें राज्य का भारी नुकसान हुआ है।


2013 की बात करें तो इस साल ब्रह्मपुत्र नदी में आए बाढ़ की वजह से जून में 27 में 12 जिले बाढ़ की चपेट में थे। वहीं 100,000 लोग बाढ़ और पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे थे। इस बाढ़ में 396 गांव प्रभावित हुए थे और 7000 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई थी।

वहीं साल 2012 में आए बाढ़ की वजह से 124 लोगों की जान चली गई थी। 6 मिलियन लोग विस्थापित हुए थे। इस साल काजीरंगा नेशनल पार्क में 540 जानवरों की मौत हो गई थी।