आज के जमाने में संयुक्त परिवार  के क्या फायदे होते हैं, यह कोई इलाहाबाद  के पास स्थित गांव बहराइचा के राम नरेश भुर्तिया से पूछ सकता है।  चुनौवी मौसम में तो इनके परिवार की पूछ-परख कुछ अधिक ही बढ़ जाती है।  आखिर ऐसा हो भी क्यों ना भला।  राम नरेश भुर्तिया के संयुक्त परिवार में 82 सदस्य हैं, जिनमें से 66 मतदाता हैं।  ऐसा ही एक और परिवार है मिजोरम में, जिसके कुल 162 सदस्यों में से 98 मतदान का अधिकार रखते हैं। 

98 साल के राम नरेश हैं परिवार के मुखिया

रविवार को छठे चरण के चुनाव में राम नरेश के यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के बूथ कार्यकर्ता पर्ची पहुंचाने में व्यस्त रहे. खेती-किसानी करने वाले इस परिवार के दो सदस्य फिलहाल मुंबई की निजी कंपनी में कार्यरत हैं।  परिवार को किसी तरह की आर्थिक दिक्कत नहीं है।  इसी वजह से सभी आज भी एक साथ एक ही छत के नीचे खुशी-खुशी रह रहे हैं।  भुर्तिया कहते भी हैं कि उनके परिवार में आज तक किसी ने भी संयुक्त परिवार से अलग होने की बात नहीं की है. इस एका की सीख समाज को लेनी चाहिए। 

एक दिन में खर्च होता है इतना राशन

परिवार के मुखिया अभी भी 98 साल के राम नरेश ही हैं. उन्हें इस बात का सबसे ज्यादा गर्व है कि पूरे परिवार का खाना एक ही रसोई में बनता है।  इतने सारे सदस्यों का पेट भरने के लिए हर रोज 20 किलो सब्जियां, 15 किलो चावल और 10 किलो आटे की जरूरत पड़ती है।  रोचक बात यह है कि इस छोटी-मोटी 'बारात' का खाना परिवार की महिलाएं ही तैयार करती हैं। 

मिलिए मिजोरम के जिओना परिवार से

विश्व के सबसे बड़े परिवार के खिताब से नवाजे गए मिजोरम के इस परिवार का मुखिया जिओना है।  उनकी 38 पत्नियों से 32 बेटे, 18 बेटियां, 22 पौत्र औऱ 26 नातिनों समेत सात पड़पोते-पोतियां हैं।  सभी एक ही घर में रहते हैं. बांग्लादेश और मिजोरम सीमा पर स्थित गांव में रहने वाला जिओना परिवार विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव में भी राजनीतिक दलों की आंख का तारा रहता है।