उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ देशद्रोह का मामला खारिज कर दिया। दुआ के खिलाफ पिछले वर्ष कोविड-19 को लेकर लगाये गये लॉकडाउन के दौरान पेश आ रही मुश्किलों से निपटने को लेकर यू-ट्यूब वीडियो में सरकार की आलोचना करने पर देशद्रोह का मामला दर्ज कराया गया था। 

हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महासू इकाई के अध्यक्ष अजय श्याम ने दुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी। न्यायमूर्ति यू यू ललित और विनीत सरन ने दुआ के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुए कहा कि 1962 का एक आदेश इस तरह के आरोपों से प्रत्येक पत्रकार को संरक्षित करता है। पीठ ने हालांकि दुआ की 10 वर्ष के अनुभवी किसी भी पत्रकार के खिलाफ बगैर एक विशेषज्ञ समिति की मंजूरी के कोई प्राथमिकी दर्ज न करने का आदेश देने संबंधी अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि इससे स्पष्ट रूप से विधायिका के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण होगा। 

न्यायालय ने पिछले वर्ष छह अक्टूबर को दुआ, हिमाचल प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। यूट्यूब प्रोग्राम ‘विनोद दुआ शो’ को लेकर दुआ के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए, 268, 501 और 505 के तहत आरोप लगाये गये थे कि वह फर्जी खबरें फैला रहे हैं, मानहानि करने वाली सामग्री प्रकाशित कर रहे हैं और जनता के लिए परेशानी पैदा करने वाले बयान दे रहे हैं।