देश के कर्मचारी राज्य बीमा निगम के आंकड़े बताते हैं कि बीते साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर में करीब 12.67 लाख नौकरियां सृजित हुईं। इससे एक महीना पहले यानी नवबंर 2019 में 14.59 लाख नौकरियां सृजित हुई थीं। इस लिहाज से एक महीने में करीब 1.92 लाख नौकरियों के सृजन में कमी आई है। ये रोजगार के मोर्चे पर अच्‍छी खबर नहीं है।

इसी तरह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंकड़ों में बताया गया है कि दिसंबर 2019 में फॉर्मल सेक्‍टर में नौकरी सृजन 10.08 लाख पर था जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 5.59 लाख नौकरियां सृजित की गई थीं। वैसे तो एक साल में 5 लाख से अधिक की बढ़त हुई है लेकिन नवंबर 2019 से तुलना करें तो रोजगार सृजन में कमी आई है। बता दें कि नवंबर में 10.09 लाख नई नौकरियां सृजित हुई थीं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की मानें तो वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान ईएसआईसी के साथ कुल 1.49 करोड़ नए कर्मचारियों/श्रमिकों के नामांकन कराए गए। सितंबर 2017 से दिसंबर 2019 के दौरान लगभग 3.50 करोड़ नए लोग ईएसआईसी योजना में शामिल हुए। गौरतलब है कि एनएसओ की रिपोर्ट इएसआइसी, इपीएफओ और पेंशन फंड नियामक तथा विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत बनाए गए नए सदस्यों के पेरोल डेटा पर आधारित है। अप्रैल 2018 से इन तीनों निकायों के नए सदस्यों के आंकड़ों के आधार पर नौकरियों के आंकड़े जारी किए जा रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2017 से दिसंबर 2019 के दौरान कर्मचारी भविष्य निधि फंड योजना में करीब 3.12 करोड़ नए सदस्य शामिल हुए।

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