कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन ने कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मुश्किल समय में अपनी खाताधारकों की बहुत मदद की है। ताजा खबर यह है कि केंद्र सरकार ने पेंशन मद में 868 करोड़ रुपए के साथ ही 105 करोड़ रुपए की बकाया राशि भी जारी कर दी है। इस राशि का उपयोग EPFO पेंशनधारकों को बढ़ी हुई पेंशन का भुगतान करने के लिए किया जाएगा।


EPFO की सिफारिश के आधार पर, भारत सरकार ने श्रमिकों द्वारा लंबे समय से की जा रही मांगों में से एक को स्वीकार कर लिया है। मांग यह थी कि नौकरी के 15 साल के बाद पेंशन के परिवर्तित मूल्य को बहाल करने की अनुमति प्रदान की जाए।


अब तक, परिवर्तित पेंशन को बहाल करने का कोई प्रावधान नहीं था और पेंशनभोगियों को आजीवन कम पेंशन मिल रही थी। ईपीएस-95 के अंतर्गत, पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह एक ऐतिहासिक कदम है।

EPFO के पास 135 क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 65 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी हैं। EPFO के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि के दौरान, सभी बाधाओं को पार किया और मई, 2020 के लिए पेंशन भुगतान की राशि में परिवर्तन करवाया, जिससे पेंशनभोगियों के बैंक खाते में समय पर उनके पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।


इससे पहले अप्रैल की पेंशन समय से पहले ही जारी कर दी गई थी। तब कुल 764 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। इस राशि को एडवांस पेंशन के तौर पर दिया जाना था। तब EPFO की ओर से कहा गया था कि समय से पेंशन खातों में पहुंचाना सर्वोच्‍च प्राथमिकता है। फंड जारी करने के साथ ही ईपीएफओ ने सभी बैंक ब्रांचों से सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वे पेंशनरों के खाते में समय से पेंशन जमा कर दें। EPS के तहत कंपनी के 8.33 फीसदी योगदान को पेंशन के रूप में जमा किया जाता है।