कोरोना वायरस काल के दौरान कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। ऐसे में जिन परिवारों ने अपने कमाऊ सदस्य खो दिया है उनके लिए खासा नुकसान हुआ है।  नुकसान से निपटने के लिए आश्रितों की ओर से हस संभव प्रयास किया जा रहा है। कई लोग जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऐसे में लोगों के लिए यह जानकारी जरूरी है कि वह इन परिस्थियों में क्या करें कि उन्हें लाभ मिले और जिंदगी का गुजारा अच्छे से हो।

ईपीएफ में नॉमिनी के तौर पर जुड़े लोग खाते की राशि को लेकर दावा कर सकते हैं। ऐसे में कई बार देखा गया है कि कर्माचारी जानकारी के अभाव में नॉमिनी को नहीं जोड़ पाते हैं। इस स्थिति में इस राशि के लिए कानूनी उत्तराधिकारी अपना दावा ठोक सकता है।

बता दें कि पहले, नॉमिनी को मृत्यु के दावे के लिए फॉर्म 20, फॉर्म 10डी और फॉर्म 5 (आईएफ) जमा करना पड़ता था। लेकिन अब ईपीएफओ ने मृत्यु के दावों के लिए मृत्यु के मामलों में सभी दावा फॉर्म पेश किया है।

यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पति या पत्नी को पेंशन दी जाएगी। ईपीएस नियमों के अनुसार, एक ईपीएस सदस्य की मृत्यु पर एक पति या पत्नी और दो बच्चों को पेंशन मिलेगी। हालांकि बच्चों की आयु 25 वर्ष से कम होनी चाहिए और 25 वर्ष की आयु तक विधवा की पेंशन का 25% प्राप्त होगा।
ईडीएलआई के तहत न्यूनतम लाभ 2.5 लाख रूपये है, और अधिकतम ₹7 लाख है, भले ही कर्मचारी का वेतन कुछ भी हो। सभी ईपीएफ सदस्य ईडीएलआई के लिए पात्र हैं और नियोक्ता इसमें योगदान देता है।
ईडीएलआई के तहत कर्माचारी के परिजन को न्यूनतम 2.5 लाख रुपये और अधिकतम 7 लाख रुपये मिलते हैं। इस लाभ के लिए यह मायने नहीं रखता है कि कर्मचारी का वेतन कितना है। सभी ईपीएफ सदस्य ईडीएलआई के लिए पात्र होते हैं। इसके लिए कंपनी की ओर से कंट्रिब्यूशन राशि दी जाती है।

इसके अलावा अन्य देय राशि जैसे वेतन लाभ, वैधानिक बोनस, आदि का भुगतान नॉमिनी को किया जाएगा। नॉमिनी के अभाव में यह सहायता कानूनी रूप से वारिस परिजन को मिलता है।