अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को हरी झंडी मिल जाती है तो लोकसभा और मिजोरम सहति 12 राज्यों में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं। इसमें झाड़खंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभा के कार्यकाल फरवरी के पहले हफ्ते तक हैं। इसके दो महीने बाद लोकसभा चुनाव हैं। उसी दौरान अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, सिक्किम और आंध्रप्रदेश विधानसभा के चुनाव होंगे।


वहीं झारखंड सरकार का कार्यकाल दिसंबर 2019 तक है। इसके आसपास ही हरियाणा, व महाराष्ट्र में चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव पहले हो जाए तो चार राज्यों में समय से पूर्व विधानसभा भंग करके एक साथ 12 राज्यों में चुनाव कराए जा सकते हैं।


ऐसे हो सकते हैं एक साथ चुनाव
इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि कानून में संशोधन के बिना सभी विधानसभा चुनाव लोकसभा के साथ नहीं करवा सकते। हां किस्तों में साथ चुनाव जरूर करवा सकते हैं, बशर्तें राज्य इस पर सहमत हो। वहीं भाजपा और कांग्रेस इस पर आमने-सामने है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विधि आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि देश हर समय चुनाव मोड में नहीं रह सकता। इस पर कांग्रेस ने कहा कि हम तैयार हैं, भाजपा ऐसा करके तो दिखाए। ऐसे में कयास एक नए फॉर्मूले पर लगाया जा रहा है। जिसमें केंद्र सरकार 2019 के लोकसभा और 12 राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेज सकता है। इन 12 में से सात राज्यों में भाजपा की सरकार है।


भाजपा को अपने इस नए फॉर्मूले के पीछे रिस्क कम फायदा ज्यादा नजर आ रहा है। लोकसभा के साथ 12 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने के पीछे मकसद भाजपा शासित राज्यों में एंटी इंकम्बेंसी से पीछा छुड़ाने और राज्यों के चेहरों के बजाय प्रधानमंत्री मोदी के दम पर चुनाव लड़ना है, क्योंकि राज्यों में भाजपा सरकारों से जनता में काफी नाराजगी है।

भाजपा को हो सकता है फायदा
भाजपा लोकसभा के साथ राज्यों में विधानसभा चुनाव इसलिए भी कराना चाहती है, ताकि वह राज्यों में ब्रांड मोदी का फायदा उठा सके। भाजपा की उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में सरकार है। जिन 12 राज्यों में चुनाव हो सकते हैं, उनमें से 8 में सीधी लड़ाई भाजपा-कांग्रेस के बीच हो सकती है। ऐसे में यहां मोदी बनाम राहुल के बीच राजनीतिक मुकाबला होगा।


इस साल नवंबर-दिसंबर में देश के चार राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम शामिल हैं। इनमें तीन राज्यों में भाजपा की सरकार है। मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है। यहां सरकारों का कार्यकाल दिसंबर और जनवरी में खत्म हो रहा है। इन राज्यों के चुनाव को चुनाव आयोग आम चुनाव तक टाल सकता है। ऐसे में इन राज्यों में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है। जिन 3 राज्यों में लोकसभा के बाद चुनाव होने हैं। उनमें हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार का कार्यकाल अगले साल नवंबर तक है। झारखंड सरकार का कार्यकाल दिसंबर 2019 में खत्म हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग इन राज्यों में 7 से 8 महीने पहले चुनाव करवा सकता है।