चुनाव से पहले वोटरों को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटने या फ्री वाली स्‍कीम का वादा (Free scheme promises) करने वाले राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट (SC) में सुनवाई हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने इसे लेकर चार हफ्ते में जवाब देने का कहा है। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के मुफ्त उपहार देने से वादे पर चिंता जताई है। मुख्य न्यायधीश एनवी रमना (Chief Justice NV Ramana) ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है, कई बार सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि यह एक समान खेल का मैदान नहीं है। पार्टियां चुनाव जीतने के लिए और अधिक वादे करती हैं। अर्जी में याचिकाकर्ता ने कहा था कि राजनीतिक पार्टियों द्वारा सरकारी फंड से चुनाव से पहले वोटरों को उपहार देने का वादा करने या उपहार देने का मामला स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करता है।

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने याचिकाकर्ता से कहा कि उन्होंने सिर्फ कुछ पार्टियों को ही शामिल क्यों किया है। याचिकाकर्ता की ओर से विकास सिंह ने कहा कि वो बाकी पार्टियों को भी शामिल करेंगे। दरअसल, राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को रिझाने के लिए सार्वजनिक कोष से मुफ्त 'उपहारों' के वादे का वितरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में चुनाव आयोग को ऐसे राजनीतिक दलों का चुनाव चिन्ह को जब्त करने और पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने की मांग की है। कहा गया है कि मुफ्त 'उपहारों' को घूस माना जाना चाहिए।

इस याचिका में उदाहरण देते हुए बताया गया था कि अगर AAP पार्टी पंजाब की सत्ता में आती है तो उसे राजनीतिक वादों को पूरा करने के लिए हर महीने 12,000 करोड़ की जरूरत होगी। इसी तरह अकाली दल के सत्ता में आने पर प्रति माह 25,000 करोड़ रुपए और कांग्रेस के सत्ता में आने पर 30,000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी, जबकि पूरे पंजाब का जीएसटी संग्रह मात्र 1400 करोड़ रुपए है। याचिका में कहा गया है कि वास्तव में कर्ज चुकाने के बाद पंजाब सरकार वेतन-पेंशन भी नहीं दे पा रही है तो वह 'उपहार' कहां से देगी?

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय (Petitioner Ashwini Upadhyay) ने कहा था कि वह समय दूर नहीं है जब एक राजनीतिक दल कहेगा कि हम घर आकर आपके  लिए खाना बनाएंगे और दूसरा यह कहेगा कि  हम न केवल खाना बनाएंगे, बल्कि आपको खिलाएंगे। सभी दल लोकलुभावन वादों के जरिए दूसरे दलों से आगे निकलने की जुगत में है।