एक भारतीय पत्नी की जिद और जज्बे के कारण विदेश की मिट्टी में दफन उसके पति को अब अपने देश की मिट्टी नसीब होगी। यह कहानी है उस महिला कि जिसने निर्णय लिया कि उसके पति का अंतिम संस्कार उन सभी रीति-रिवाजों के साथ होगा, जो किसी भी अन्य हिंदू को नसीब होता है। आखिरकार वह यह जंग जीत गई। 

दरअसल, सऊदी अरब में एक भारतीय हिंदू व्यक्ति को मुस्लिम समझकर उसे इस्लामिक रीति-रिवाजों के तहत दफन कर दिया गया था, लेकिन अब सऊदी सरकार ने उस कब्र की पहचान कर ली है और मृतक के अवशेषों को भारत भेजने पर विचार कर रही है। भारत सरकार ने हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि जेद्दाह में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने मृतक के अवशेष वापस लाने के लिए सऊदी अदालत में कानूनी कार्यवाही शुरू की है। 

मृतक की पत्नी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी और अपने पति के अवशेषों को भारत लाने की मांग की थी, ताकि यहां उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। हाईकोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने इस याचिका पर सुनवाई की। महिला ने मार्च में इस याचिका को दायर किया था। जिसमें विदेश मंत्रालय से मांग की गई कि वे अवशेषों को एक निर्धारित समय के भीतर भारत वापस लेकर आए।

51 वर्षीय संजीव कुमार का 24 जनवरी को सऊदी अरब में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। संजीव सऊदी अरब में ही काम किया करते थे। निधन के बाद उनके शव को वहीं पर एक अस्पताल में रखा गया। 18 फरवरी को उनकी पत्नी अंजू शर्मा को बताया गया कि उनके पति को सऊदी अरब में ही दफना दिया गया है। तभी से पूरा परिवार उनके अवशेषों को भारत लाने की मांग कर रहा है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में अंजू शर्मा ने बताया है कि भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने उनसे कहा कि जेद्दाह स्थित दूतावास के आधिकारिक अनुवादक की गलती की वजह से उनके पति को दफनाया गया। अनुवादक ने गलती से संजीव कुमार को मृत्यु प्रमाणपत्र पर ‘मुस्लिम’ बता दिया था।