उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नागालैंड के दीमापुर स्थित राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कहा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश की असीम क्षमता है और आसियान देशों को इस अवसर को खोना नहीं चाहिए। इस मौके पर नागालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।


उपराष्ट्रपति ने कहा कि पारंपरिक विरासत से समृद्ध नागालैंड तेजी से प्रगति कर रहा है। इसके साथ उन्होंने कहा कि एनआईटी की स्थापना इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। किसी शैक्षणिक संस्थान की वास्तविक ताकत उसके द्वारा उच्च मानको को निरंतर बनाये रखने पर आधारित है जो अध्यापन और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान से जुड़ी हुई है।


उपराष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। लेकिन अपनी क्षमता का सही उपयोग करने में कुछ समस्याएं हैं जैसे दुर्गम क्षेत्र, सुदूर क्षेत्रों में बसी आबादी, अच्छी कनेक्टिविटी का अभाव तथा अपर्याप्त आधारभूत संरचना। पूर्वोत्तर क्षेत्रों को मुख्य धारा में लाने के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जाना चाहिए। पर्यटन, व्यापार तथा लोगों में आपसी संपर्क को बेहतर बनाने के लिए हवाई कनेक्टिविटी भी आवश्यक है। हमारा विश्वास है कि कनेक्टिविटी के गलियारे को आर्थिक विकास के गलियारे के रूप में परिवर्तित किया जाना चाहिए।


उपराष्ट्रपति ने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का हवाला देते हुूए कहा, ‘शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसे आप दुनिया को बदलने के लिए उपयोग कर सकते हैं ।’उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों द्वारा प्राप्त किये गये ज्ञान और तकनीकी कौशल ही उनके भविष्य के प्रमुख स्तंभ होंगे।

समावेशी नये भारत के निर्माण तथा जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए नैतिकता, प्रतिबद्धता तथा करूणा जैसे मूल्य भी आवश्यक हैं। उपराष्ट्रपति ने छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि शिक्षा डिग्री प्राप्त करने या रोजगार प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। ज्ञान प्राप्ति जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है।