एडिटर्स गिल्ड ने सोमवार को कहा कि दि शिलांग टाइम्स अखबार इसकी संपादक और प्रकाशक के खिलाफ अवमानना के एक मामलें में मेघालय उच्च न्यायालय का आदेश धमकाने वाला और प्रेस की आजादी को कमजोर करने वाला है। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दि शिलांग टाईम्स की संपादक पैट्रीशिया मुखीम और प्रकाशक शोभा चौधरी को अवमानना के एक मामले में अदालत की कार्यवाही खत्म होने तक अदालत कक्ष के एक कोने मे जाकर बैठने और उन पर दो-दो लाख रूपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था।


यह मामला सेवानिवृत्त न्यायाधीशों एवं उनके परिवारों के लिए भत्तों और सुविधाओं पर अखबार की ओर से प्रकाशित किए गए एक आलेख से जुड़ा है। एडिटर्स गिल्ड ने एक बयान में कहा कि मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश से काफी व्यथित है। गिल्ड ने कहा कि आदेश के तहत जुर्माना भी लगाया गया, जेल भेजने और अखबार के प्रकाशन पर पाबंदी लगाने की धमकी भी दी गई, जो धमकाने वाला और प्रेस की आजादी को कमजोर करने वाला है।

बयान के मुताबिक यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस न्यायपालिका को प्रेस की आजादी बरकरार रखनी चाहिए, उसने एेसा करने की बजाय अभिव्यक्ति की आजादी को खतरा पैदा करने वाला आदेश जारी किया।