प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने चुनाव आयोग पर भाजपा सरकार की कठपुतली की तरह काम करने का आरोप लगाया है उन्होंने ईवीएम रिंगिंग की आशंका जताते हुए हर स्ट्रांग रूम की चौबीसों घंटों कांग्रेस कर्मियों की ओर से पहरेदारी की बात भी कही है। यहां राजीव भवन में पत्रकारों से मुलाकात में बोरा ने विशेष तौर से राज्य निर्वाचन आयोग पर अपना नजला उतारा।

उन्होंने कहा कि असम में चुनाव आयोग का पूरा तंत्र पक्षपात भरा रवैया अपनाता महसूस हुआ है, भाजपां के एजेंट जैसा। बोरा के मुताबिक सत्ताधारी पक्ष की ओर से आदर्श आचार संहिता के उल्लघंन की घटनाओं की फौरी शिकायतों के बावजूद किसी में भी राज्य चुनाव आयोग ने कोई कदम नहीं उठाया। एक स्थानिय न्यूज चैनल में बीती रात मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में हुए चुनाव के संभावित परिणामों पर अपनी राय रखी थी।

वह आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसकी शिकायत उन्होंने फौरन आयोग से की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आशंका जताई है कि इसका असर देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से गत दिवस कोलकता में दिए गए बयान को सुप्रिम कोर्ट की खुली अवमानना बताया। शाह ने अपने भाषण में कथित तौर पर कहा था कि भाजपा सत्ता में आई तो पहले नागरिकता विधेयक लागू होगा, बाद में एनआरसी घोषित होगी।

बोरा ने कहा कि सुप्रिम कोर्ट ने साफ तौर पर एनआरसी प्रकाशन की तिथि तय कर रखी है ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की उक्त बयान सुप्रिम कोर्ट के अधिकारों को चुनौती देने जैसा है। बोरा के मुताबकि यह आशंका इसलिए है कि क्यों कि पिछली बार देखा गया था कि किसी-किसी मतदान केंद्र में कांग्रेस के पक्ष में एक भी मत नहीं दिखा। यह कैसे संभव हो सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इस क्रम में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक हरेकृष्ण डेका ने मंगलवार के मतदान के बाद दिए गए बयान का हवाल भी दिया।