चुनाव आयोग ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने की वजह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष पर 24 घंटे के लिए चुनावी प्रचार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। घोष पर कथित भड़काऊ सार्वजनिक बयान देने के आरोपों के बाद यह कार्रवाई की गई है। चुनाव आयोग उनकी ओर से पेश किए गए जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और इसने दिलीप घोष पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की है।

आदेश में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने घोष को कड़ी चेतावनी दी है और उन्हें आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान सार्वजनिक टिप्पणी करते समय इस तरह के बयान देने से परहेज करने की सलाह दी गई है। घोष को इस तरह की टिप्पणी करने से रोकने के लिए चेतावनी देने के अलावा उन पर चुनावी प्रचार की रोक गुरुवार शाम 7 बजे से लागू हो गई है और यह शुक्रवार शाम 7 बजे तक प्रभावी रहेगी। 

दिलीप घोष पर यह कार्रवाई सितलकूची मामले को लेकर दिए गए बयान की वजह से हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कई अन्य जगहों पर भी इस तरह की घटनाएं होंगी। गौरतलब है कि कूचबिहार के सितलकूची में चौथे चरण के मतदान के दौरान एक बूथ पर हिंसा में चार लोग मारे गए थे। सीआईएसएफ और चुनाव आयोग के मुताबिक, भीड़ के हमले के बाद सुरक्षाबलों को गोली चलानी पड़ी थी। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि दिलीप घोष पर कार्रवाई की जाए। बता दें कि चुनाव आयोग ने 13 अप्रैल को दिलीप घोष के एक भडक़ाऊ बयान को लेकर नोटिस भेजा था।

घोष ने अपने जवाब में कहा था कि आदर्श आचार संहिता और जनप्रतिनिधि अधिनियम/भारतीय दंड संहिता के उल्लंघन वाला कोई भी बयान देना उनका उद्देश्य कभी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में सावधान रहेंगे। हालांकि उनके इस स्पष्टीकरण से चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं हुआ और इसने उन पर चुनावी प्रचार की रोक लगा दी।